देहरादून। ब्राह्मण समाज उत्थान परिषद ने शुक्रवार को जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को सात सूत्री मांगों का एक ज्ञापन भेजा है। इसमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उच्च शिक्षण संस्थानों से संबंधित विनिमयों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों की सांविधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
परिषद ने अपनी सात सूत्री मांगों में यूजीसी के संबंधित विनिमयों की निष्पक्ष सांविधानिक समीक्षा कराने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य किसी भी वर्ग के प्रति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भेदभाव को रोकना है। परिषद ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि शिकायत निवारण व्यवस्था का दुरुपयोग न हो। किसी निर्दोष विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी को जातीय या सामाजिक पहचान के आधार पर प्रताड़ित न किया जाए। ज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा में समान अवसर मांगे गए हैं। इसमें छात्रवृत्ति, शुल्क सहायता और अन्य सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था शामिल है।
उच्च शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार के भेदभाव की शिकायत की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। यह प्रमाण आधारित और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप हो। इसमें शिकायतकर्ता और आरोपित दोनों के अधिकारों की रक्षा हो। परिषद ने यूजीसी के विनिमयों की समीक्षा के लिए शिक्षाविदों और विधिवेत्ताओं से परामर्श का सुझाव दिया है। इसका लक्ष्य सामाजिक न्याय और सांविधानिक समानता का संरक्षण करने वाला संतुलित ढांचा तैयार करना है। इस दौरान परिषद के अध्यक्ष सुभाष जोशी, उपाध्यक्ष एसपी पाठक, महामंत्री उमा नरेश तिवारी, संगठन मंत्री राजकुमार तिवारी, पवन त्रिपाठी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।