उत्तराखंड में ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का दावा करने वाली पायका योजना पर अफसरों के खेल ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
खिलाड़ियों को रिंग में उतरने से नहीं रोका
अब ग्रामीण बॉक्सिंग में खेल विभाग के हॉस्टलों के खिलाड़ियों को उतार दिया गया। इस संबंध में पहले भी शिकायतें आने के बावजूद अफसरों ने कोटद्वार बॉक्सिंग हॉस्टल और साई सेंटर काशीपुर के खिलाड़ियों को रिंग में उतरने से रोका नहीं।
परेड ग्राउंड स्थित बॉक्सिंग रिंग में बुधवार से स्वामी विवेकानंद राज्य स्तरीय ग्रामीण खेलकूद (अंडर-16 बालक एवं बालिका) प्रतियोगिता के तहत बॉक्सिंग मुकाबले शुरू हुए। बालक वर्ग के कुछ मुकाबलों को छोड़कर बाकी मुकाबले एकतरफा रहे।
एक-दो मुकाबले तो पहले राउंड का समय खत्म होने से पहले ही निपट गए। अमर उजाला ने जीतने वाले खिलाड़ियों के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि इनमें से पांच कोटद्वार बॉक्सिंग हॉस्टल से आए हैं। साई सेंटर काशीपुर के भी पांच खिलाड़ी अप्रशिक्षित ग्रामीण खिलाड़ियों को धो रहे थे।
फुटबॉल खिलाड़ी बनी बॉक्सर
पायका में फर्जीवाड़ा इस कदर हावी है कि सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए दूसरे खेल के खिलाड़ियों को अन्य खेल में भेज दिया जा रहा है।
बॉक्सिंग प्रतियोगिता के दौरान ऐसी ही एक महिला खिलाड़ी मिली जो खेलती तो फुटबाल है, लेकिन संख्या बढ़ाने के लिए अफसरों ने उसे बॉक्सिंग टीम में भेज दिया। इसके अलावा दो और महिला फुटबॉल खिलाड़ियों को बॉक्सिंग खिलाड़ी बनाकर भेजा गया था।
स्पोर्ट्स कॉलेज के खिलाड़ी नहीं आए
प्रतियोगिता में स्पोर्ट्स कॉलेज रायपुर के खिलाड़ी नजर नहीं आए। पता चला कि दो दिन पहले वालीबाल प्रतियोगिता के मैच के दौरान कॉलेज के दो खिलाड़ियों के प्रतिभाग की शिकायत मिली थी। इसके बाद प्रतियोगिता का रिजल्ट रोक दिया गया। ऐसे में बॉक्सिंग में कॉलेज ने कोई खिलाड़ी नहीं भेजा।
पायका के तहत ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है। खेल में फर्जी खिलाड़ी खेलाए जाएंगे या फिर इसमें स्पोर्ट्स हॉस्टल, साई सेंटर के प्रशिक्षित खिलाड़ी खेल रहे हैं, तो उसकी जांच कराई जाएगी।
- अजय अग्रवाल, सहायक समादेष्टा, पायका
कोटद्वार हॉस्टल से पायका खेल में पांच खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों को जिला स्तर पर ट्रायल के बाद चुना गया था। इनमें से चार कोटद्वार के ही रहने वाले हैं।
- डीसी भट्ट, कोच, कोटद्वार हॉस्टल