बकौल वन संरक्षक व वन अनुसंधान शाखा के निदेशक संजीव चतुर्वेदी, यदि इन मसालों, फलाें का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में ये सभी प्रजातियां समाप्त हो जाएगी। जिसका सीधा असर पहाड़ के लोगों की आर्थिकी पर भी पड़ेगा।
राज्य में है जंगली फलों की 67 व सब्जियों की 27 प्रजातियां
वनस्पति विज्ञानियों की ओर से किए गए शोध में यह बात सामने आई है कि कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में जंगली फलों की 67 व सब्जियों की 27 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें तमाम ऐसी प्रजातियां हैं जो कई पर्यावरणीय व वैज्ञानिक कारणों के चलते लुप्तप्राय होने के कगार पर हैं जिनके संरक्षण की जरूरत है।
बहुतायत में पैदा होते हैं सेब, खुमानी, नाशपाती व प्लम
वनस्पति विज्ञानियों की मानें तो देवभूमि में सेब, नाशपाती, खुमानी व प्लम जैसे फल बहुतायत में होते हैं। इन फलों की वजह से पहाड़ के लोगों की आर्थिकी को मजबूती मिलती है। इन फलों पर व्यापारिक स्तर पर उत्पादन हो, इसके लिए राज्य सरकार की ओर से उद्यान विभाग के जरिए कई योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। जिनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।