शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित दून बुक फेस्टिवल का शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बतौर मुख्य अतिथि शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव भारतीय ज्ञान व विचार परंपरा को जन-जन तक पहुंचाएगा। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रकाशकों की ओर से लगाए गए स्टॉल का अवलोकन किया। साथ ही गढ़वाली व कुमाऊंनी पुस्तकों का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान का स्थायी स्रोत हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी समाज को दिशा प्रदान करती हैं। एआई के इस दौर में भी किताबें अनमोल हैं।
परेड मैदान में आयोजित फेस्टिवल के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने देशभर से आए साहित्यकारों, कलाकारों व साहित्य प्रेमियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम है, जो समाज में ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान को नई दिशा प्रदान करेगा। नौ दिवसीय महोत्सव में विभिन्न सत्रों, संवाद कार्यक्रमों, पुस्तक परिचर्चाओं और लेखक से मिलिए जैसे आयोजनों के माध्यम से साहित्यिक विमर्श को समृद्ध किया जाएगा। साथ ही चिल्ड्रेन पवेलियन से नई पीढ़ी में पठन-पाठन की रुचि विकसित होगी। सरकार की ओर से भी उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान, साहित्य भूषण और अन्य पुरस्कारों के माध्यम से साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। इसके अलावा साहित्य ग्रामों के जरिए साहित्यकारों को सृजन के लिए अनुकूल वातावरण देने के लिए साहित्यिक पर्यटन को प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, मेयर सौरभ थपलियाल, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक, देवभूमि उत्तराखंड विवि के उपाध्यक्ष अमन बंसल आदि मौजूद रहे।
Iमन के लिए पुस्तकों का वाचन अनिवार्य : प्रो. मिलिंद
I
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. मिलिन्द मराठी ने उत्तराखंड को भारतीय संस्कृति और वीरता का संगम बताते हुए कहा कि जिस तरह शरीर के लिए व्यायाम जरूरी है, वैसे ही मन के लिए पुस्तकों का वाचन अनिवार्य है। उन्होंने वेदव्यास, महर्षि कण्व, सुंदरलाल बहुगुणा और बछेंद्री पाल जैसी विभूतियों का जिक्र करते हुए इस भूमि की बौद्धिक उर्वरता बताया।
Iइन पुस्तकों को सीएम ने किया लोकार्पण
I
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाली में अनूदित पुस्तकें जैसे चौरी-चौरा जनक्रांति को नयो सबेरो, नन्ना हैरा चखुला, उम्मीदै किरण, गैरा सागरा अजूबा, आदमी अर छैल अर हौरी कहानि आदि और कुमाऊंनी भाषा में अनूदित पुस्तकें जैसे माटि म्यर देशे कि, अभिमानै हार, बढ़नै जाणी कान, खाटू श्यामक अणसुणि कहाणि, गुलाब क दगड़ू समेत कुल 26 पुस्तकों का लोकार्पण किया। वहीं, बाल मंडप में पेंटिंग गतिविधि में प्रतिभाग करने वाले बच्चों से सीएम धामी ने बातचीत भी की।
I
I
Iज्ञान और संस्कृति के आदान-प्रदान का मंच है महोत्सव : आचार्य बालकृष्ण
I
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह महोत्सव केवल एक मेला नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के आदान-प्रदान का मंच है। उन्होंने आधुनिक तकनीक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एआई अपने आप में चैतन्य चीज नहीं है, वह केवल डेटा सर्च करने का काम करता है, वास्तविक सूचना और ज्ञान के लिए मूल लेखकों को पढ़ना जरूरी है।
Iपांडवाज ने जमाया रंग
I
महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक बैंड पांडवाज ने खूब रंग जमाया। बैंड के कलाकारों ने अपने लोकप्रिय गीतों और पारंपरिक लोक गाथाओं को आधुनिक अंदाज में पेश किया, जिसे दर्शकों ने सराहा। पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोक वेशभूषा ने प्रस्तुति को और भी आकर्षक बना दिया।