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'अमर उजाला पुस्तक मेला समाज के लिए आदर्श'

Mon, 18 Aug 2014 12:31 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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पुस्तक मेला समाज के लिए आदर्श है। समाज और पुस्तक ही हमारा बौद्धिक विकास करते हैं।
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विधानसभा अध्यक्ष ने व्यक्त किए विचार
पुस्तकें हमेशा जिंदा रहेंगे, इनके बिना तो इतिहास की कल्पना भी बेमानी है। अमर उजाला पुस्तक मेले में रविवार को आयोजित गोष्ठी में विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने यह विचार व्यक्त किए।

आधारशिला प्रकाशन की ओर से मेले में ‘समाज और पुस्तक’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में आधारशिला प्रकाशन के विशेषांक, डॉ. उमेश चमोला और विनीता जोशी की गढ़वाली व कुमाऊंनी कविता संग्रह और दिवाकर भट्ट की पुस्तक हरिपाल त्यागी का विमोचन विधानसभा अध्यक्ष ने किया।
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गोष्ठी में कई वरिष्ठ साहित्यकार पहुंचे। इस मौके पर साहित्यकार कृष्णा खुराना ने साहित्य को ज्यादा से ज्यादा समाज तक पहुंचाने पर जोर दिया। साहित्यकार दिवकार भट्ट ने पुस्तक पढ़ने की आदत को युवाओं तक ले जाने की बात पर बल दिया।

साहित्य को अपनी मिट्टी से जोड़ना जरूरी
इसके बाद साहित्यकार जितेंद्र शर्मा ने कहा कि हमें अपने साहित्य को अपनी मिट्टी से जोड़ना चाहिए। यहां की स्थानीय घटनाओं और कथाओं पर आधारित साहित्य निश्चित तौर पर हमारी देश विदेश में अलग पहचान बनाता है।

राजेश सकलानी ने पुस्तकों के समाप्त होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आज भी अंग्रेजी की पुस्तकें तो खूब पढ़ी जाती हैं लेकिन हिंदी हमसे दूर हो रही है।

इसकी वजह से हिंदी साहित्य भी संकट में आ गया है। इसके लिए उन्होंने सरकारों से प्रयास करने पर बल दिया। मुक्त विवि के डॉ. दुर्गेश पंत, मदन पांडे ने भी पुस्तकों के अस्तित्व को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
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इसके बाद पूर्व सूचना आयुक्त आरएस टोलिया ने कहा कि पुस्तकें कभी समाप्त नहीं हो सकती। वरिष्ठ लेखक गुरदीप खुराना ने किताबों के महत्व पर प्रकाश डाला। पुस्तक मेले में भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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