एयरपोर्ट निदेशक एसके सिंह ने बताया कि यदि हमें सूचना मिलती है कि विमान में बम है तो एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की सुरक्षा पद्धति के अनुरूप पहले विमान को खाली कराया जाता है। इसके लिए विमान को बिल्डिंग से दूर आइसोलेशन-वे में ले जाया जाता है जहां यात्रियों को निकालकर बस से टर्मिनल बिल्डिंग में ले आते हैं।
इसके बाद सामान आदि को निकालकर उसकी सघन चेकिंग के बाद आइसोलेशन यार्ड में एकत्र कर सुरक्षा घेरा बना दिया जाता है। डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ता आकर सामान सहित पूरे विमान की बारीकी से जांच करता है।
यदि विमान में विस्फोटक मिलता है तो रोबोट उसे उठाकर दस मीटर गहरे कूलिंग पिट (गड्ढे) में ले जाता है। तीन खंडों में बने इस कूलिंग पिट का ढांचा ऊपर से ढका होता है क्योंकि यह पता नहीं होता है कि विस्फोट का प्रभाव कितना पड़ेगा। कूलिंग पिट में बम को ले जाकर उसे डेटोनेटर से विस्फोट कर नष्ट कर दिया जाता है। वहीं, रनवे की रिकार्पेटिंग का कार्य चल रहा है।