उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सत्येंद्र प्रसाद मिश्र से उनके दूसरे कार्यकाल में बतौर वेतन और भत्ते से मिली 42 लाख रुपये से अधिक की रकम वसूल की जाएगी।
शासन ने हाईकोर्ट के आदेश के तहत सात जनवरी 2015 से लेकर उनके पूर्ण कार्यकाल तक प्राप्त परिलब्धियों की वसूली करने के आदेश जारी किए हैं। सूत्रों के मुताबिक आदेश पर विवि के लेखाधिकारी ने कुलपति के पास फाइल तो भेज दी, लेकिन बात इससे आगे नहीं बढ़ पाई है। वर्तमान कार्यवाह कुलपति ने ऐसे किसी भी आदेश से अनभिज्ञता जताई है।
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में पूर्व कुलपति प्रो. सत्येंद्र प्रसाद मिश्र ने एक कार्यकाल पूरा होने के बाद बायोडाटा में गलत जन्मतिथि अंकित कर कुलपति का पदभार दूसरी बार सात जनवरी 2015 को ग्रहण किया। मामले में नीरज कुमार धूलिया की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि कुलपति प्रो. एसपी मिश्र को तत्काल पद से हटाया जाए और उनके पूरे कार्यकाल में उन्हें मिले वेतन और अन्य भत्तों की वसूली की जाए।
21 मार्च को अपर सचिव जीबी ओली ने विवि के कुलसचिव डा. मृत्युंजय कुमार मिश्रा को इस संबंध में आदेश जारी किया था। आदेश के तहत कुलसचिव ने लेखाधिकारी को फाइल बढ़ा दी थी। सूत्रों के मुताबिक लेखाधिकारी ने विवि के कार्यवाहक कुलपति डॉ. सौदान सिंह को फाइल भेज दी। तब से अब तक फाइल का कुछ पता नहीं है।
पूर्व कुलपति प्रो. एसपी मिश्र का कार्यकाल सात जनवरी 2015 से 27 अक्तूबर 2016 तक यानी 21 माह और 20 दिन का रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रतिमाह दो लाख रुपये के हिसाब से उनसे 42 लाख रुपये से अधिक की वसूली की जानी है।
मेरे पास इस तरह की कोई फाइल नहीं आई है। न ही शासन के ऐसे किसी भी आदेश की मुझे कोई जानकारी है। जब मामला सामने आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सौदान सिंह, कार्यवाहक कुलपति, आयुर्वेद विवि