प्रो. रविकांत का कहना है कि एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन नेफ्रोटॉक्सिक होता है, लेकिन ब्लैक फंगस के संक्रमण को जड़ से समाप्त करने का फिलहाल एक मात्र विकल्प है। मरीजों के इलाज में लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल भी हो रहा है।
यह प्लेन एम्फोटेरिसिन के मुकाबले कम नुकसानदायक होता है, लेकिन प्लेन एम्फोटेरिसिन इंजेक्शन बी से 10 से 15 गुना महंगा भी होता है। प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि मरीज का शरीर इलाज के दौरान जैसा रिस्पांस करता है। वैसे ही दवा की मात्रा में बदलाव किया जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर ब्लैक फंगस के मरीज को एम्फोटेरिसिन बी का इंजेक्शन देने के दौरान एक्यूट किडनी इंजरी होती है तो एम्स ऋषिकेश में उसके प्रबंधन के डायलिसिस यूनिट समेत सभी उच्चस्तरीय सुविधा और प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है। ऐसे में एक्यूट किडनी फेल्योर के बावजूद मरीज की जान बचाई जा सकती है।