बारिश के चलते वातावरण में नमी बढ़ गई है। पुराने घरों में पानी रिसने से दीवारों में नमी आ गई है। लोग पुराने और नमी वाले स्थान पर रखे मास्क का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। वहीं बारिश के दौरान गीली मिट्टी के संपर्क में आ रहे हैं। ऐसे में ब्लड शुगर से ग्रस्त पोस्ट कोविड मरीजों और होम आइसोलेट संक्रमितों के ब्लैक फंगस की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए बारिश के दौरान सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।
एसपीएस राजकीय चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदेश कोठियाल का कहना है कि बारिश के कारण वातावरण में 90 फीसदी तक नमी बढ़ गई है। बारिश से घरों की दीवारों में भी नमी आ रही है। उन्होंने बताया कि घर में रखे पुराने मास्क में नमी आ जाती है। धूप न होने के चलते कई बार लोग गीले तौलिए का प्रयोग भी कर लेते हैं।
डॉ. कोठियाल ने बताया गमलों की मिट्टी में बारिश से काफी नमी आ जाती है। उन्होंने बताया कि पुराने मास्क, गीला तौलिया और गमलों की मिट्टी ब्लैक फंगस का कारण बन सकती है। खासकर ऐसे पोस्ट कोविड मरीज जो स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं या होम आइसोलेट संक्रमित जो हाई ब्लड शुगर से ग्रस्त हैं, वे संक्रमण की जद में आ सकते हैं।
स्टेरॉयड लेने वाले मरीज भी ब्लैक फंगस का आसान टारगेट होते हैं। डॉ. सुदेश कोठियाल ने कहा कि ब्लैक फंगस से बचाव के लिए पुराने मास्क और गीले तौलिए के प्रयोग से बचें। मिट्टी के संपर्क में आए स्थान को साबुन से धोकर साफ करें। अगर आंखों और नाक के आसपास लालिमा, सूजन, जबड़ो में दर्द, मानसिक स्थिति में बदलाव, बुखार और सिरदर्द जैसे लक्षण हैं तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।