आईडीपीएल में एम्स ऋषिकेश की ओर से संचालित राइफलमैन जसवंत सिंह रावत अस्थायी कोविड अस्पताल में अब गंभीर संक्रमित भी भर्ती किए जाएंगे। केवल वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर मरीज को एम्स में भेजा जाएगा। इसके लिए एम्स ने शासन से 10 एंबुलेंस की उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ अस्पताल के म्यूकोरमाइकोसिस केयर वार्ड को भी शुरू कर दिया गया है।
राइफलमैन जसवंत सिंह रावत अस्थायी कोविड अस्पताल का लाभ कोविड मरीजों को मिल रहा है। अस्पताल में प्रभारी डा. मधुर उनियाल ने बताया कि अस्पताल में वर्तमान में 54 कोविड मरीज भर्ती है। उन्होंने बताया कि एम्स की प्रशिक्षित डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम मरीजों का इलाज कर रही है। डा. मधुर उनियाल ने बताया कि अस्पताल में गंभीर मरीजों को भी भर्ती किया जाएगा।
अगर मरीज की परेशानी बढ़ती है और वेंटिलेटर की जरूरत है तो उसको एम्स भेजा जाएगा। एम्स अस्थायी अस्पताल से रैफर होने वाले मरीजों के लिए 100 बेड आरक्षित रखे गए हैं। शासन से मरीजों को एम्स भेजने के लिए 10 एंबुलेंस की मांग भी की गई है। उन्होंने बताया अस्पताल का म्यूकोरकोरमाइकोसिस केयर वार्ड भी चालू है। ब्लैक फंगस के संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों को वार्ड में भर्ती किया जाएगा।
दून अस्पताल में करीब 15 दिनों में तीन ब्लैक फंगस के रोगी स्वस्थ हुए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार सिर्फ कोरोना नहीं बल्कि कई अन्य कारणों से भी ब्लैक फंगस हो रहा है। इसलिए इस वक्त लापरवाही करना खतरनाक हो सकता है।
दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती अब तक 12 मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। इनमें से दो मरीजों के ब्लैक फंगस को ऑपरेशन के बाद निकाला जा चुका है, लेकिन ये मरीज लगभग 15 दिन से अस्पताल में ही भर्ती हैं। जबकि अब तक सिर्फ तीन मरीज ही स्वस्थ होकर जा चुके हैं। इसके अलावा लगभग सात मरीज ऐसे हैं, जिनमें ब्लैक फंगस के लक्षण हैं। उनकी जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
राजकीय दून मेडिकल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केसी पंत ने बताया कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ उन्हीं लोगों को ब्लैक फंगस की शिकायत हो रही है जिन्हें कोरोना हो चुका है, बल्कि साफ-सफाई का ध्यान न रखे जाने, मधुमेह पीड़ित और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी वालों में भी यह संक्रमण हो सकता है।
डॉ. पंत ने बताया कि दरअसल, ब्लैक फंगस का इलाज काफी लंबा चलता है। इसलिए ऑपरेशन के बाद भी ऐसे मरीजों को देखरेख के लिए अस्पताल में भर्ती रखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी बरतकर इससे निजात पा सकते हैं।