एक इंजेक्शन जो लगभग 15 दिन तक हर रोज एक डोज दी जाती है, वह ढाई सौ से 500 रुपये तक में आता है, जबकि दूसरा इंजेक्शन जो मरीज के वजन के हिसाब से दिया जाता है।
एक दिन में लगभग पांच इंजेक्शन अभी तक दिए जाते हैं। इस तरह से लगभग एक मरीज को 75 से 100 इंजेक्शन इस बीमारी में दिए जाने की गाइडलाइन है। ऐसे में इंजेक्शन पर ही लगभग पांच लाख रुपये खर्च हो जाते हैं।
वहीं, हेल्थ केयर सेंटर पंडितवाड़ी के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ (पल्मनोलॉजिस्ट) डॉ. परवेज अहमद ने बताया कि ब्लैक फंगस में दो तरह के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। जिसमें लाइपोसोमल एंफोटेरीसिन बी एंटीफंगल ड्रग्स को आसुत जल में ग्लूकोस के साथ मरीज को दिया जाता है। जो धीरे-धीरे मरीज के शरीर में चढ़ता है।
60 किलो के मरीज को एक बार में पांच एमजी का एक इंजेक्शन दिया जाता है। ऐसे मरीज को पांच से छह इंजेक्शन एक दिन में दिए जाते हैं।
जबकि दूसरा जो सामान्य इंजेक्शन है वह एक दिन में 15 से 20 तक दिया जाता है। अगर ब्लैक फंगस दिमाग या आंख में इंफेक्शन कर गया हो तो इसकी खुराक दोगुनी करनी पड़ती है।
वहीं, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कोरोना के नोडल अफसर एवं वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि ब्लैक फंगस में फिलहाल दो तरह के इंजेक्शन मरीजों को दिए जा रहे हैं। एक जो सस्ता है वह एक से दो हफ्ते तक रोजाना एक डोज देनी होती है। जबकि जो महंगा वाला इंजेक्शन है वह पांच वायल तक भी देनी पड़ सकती है।
आज 18 प्लस के युवकों को नहीं लगा कोरोना का टीका
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनूप कुमार डिमरी ने बताया कि जिले में 18 साल से 44 साल तक की आयु वर्ग के युवाओं को लगने वाला टीका अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। शनिवार को जिले में इस आयु वर्ग में किसी भी युवा को टीका नहीं लगा।
इसके सभी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। इस संबंध में सभी टीकाकरण केंद्रों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। वहीं 45 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को 57 केंद्रों पर टीका लगाने का कार्य किया जा रहा है।