प्रदेश में आयुष्मान भारत, राज्य आयुष्मान योजना और राज्य स्वास्थ्य स्कीम के तहत गोल्डन कार्ड पर सरकार ने ब्लैक फंगस मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा है। अब तक 51 मरीजों का कैशलेस इलाज चल रहा है। एम्स ऋषिकेश समेत तीन अस्पतालों को 12.66 लाख का भुगतान किया गया।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डीके कोटिया ने बताया कि कोरोना संक्रमित और संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों में ही ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं। आयुष्मान योजना में कोरोना मरीजों को कैशलेस इलाज की सुविधा है, लेकिन ब्लैक फंगस आयुष्मान के दायरे में नहीं था।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड धारक से सूचीबद्ध अस्पतालों में ब्लैक फंगस का कैशलेस इलाज का फैसला लिया। अब तक ब्लैक फंगस के 51 मरीजों को एम्स ऋषिकेश, महंत इन्दिरेश, हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट में कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई। जिस पर अस्पतालों को 12.66 लाख का भुगतान किया जा चुका है।
18 से 44 साल तक की आयु वर्ग के वयस्कों को आज (शनिवार) से टीका लग सकेगा। टीके की कमी होने की वजह से कुछ दिन से इस आयु वर्ग के बहुत कम लोगों को ही सरकारी केंद्रों पर टीका लग पा रहा था। टीका कम होने के कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस आयु वर्ग में स्लॉट भी कम खोले जा रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब टीके मिलने फिर से शुरू हो गए हैं। जिससे यह समस्या फिलहाल नहीं आएगी। जैसे जैसे टीके आते रहेंगे टीकाकरण अभियान को तेज गति देते रहेंगे। शुक्रवार देर रात तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सरकारी केंद्रों और उन पर स्लॉट खोलने के लिए साइट अपडेट करने में जुटे हुए थे। कोवैक्सीन सिर्फ उन्हें लगाई जाएगी जिन्हें दूसरी डोज लगाई जानी है।
दूसरी लहर के दौरान बढ़े बेड और वेंटिलेटर
कोरोना की दूसरी लहर आने के दौरान और उसके बाद जिले के विभिन्न अस्पतालों में वेंटिलेटर व आईसीयू आदि स्वास्थ सुविधा बढ़ी। इसमें पीएम केयर्स फंड से भी कुछ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और अन्य मेडिकल उपकरण आए। कंसंट्रेटर से कोरोना काल में चकराता, कालसी जैसे दूरस्थ क्षेत्र के अस्पतालों में काफी मदद पहुंचाई गई। अधिकारियों का दावा है किअब जरूरत न होने पर यह उपकरण सुरक्षित रखे गए हैं।
वर्तमान में जिले के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में कोविड के लिए 250 से अधिक वेंटिलेटर युक्त बेड हैं। कोविड मरीजों के लिए आईसीयू बेड लगभग 900, ऑक्सीजन युक्त बेड 2086 और सामान्य मरीजों के बेड की संख्या 984 है। हालांकि आजकल कोरोना के मरीज कम होने पर इनका सामान्य मरीजों के लिए भी अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनूप कुमार डिमरी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच जिला प्रशासन ने विभिन्न निजी अस्पतालों को भी वेंटिलेटर दिए गए।
कोरोना मरीज घटे, फिर भी अलर्ट पर रहेंगे अस्पताल
देहरादून जिले में कोरोना मरीजों की संख्या भले ही घटकर बहुत कम आ चुकी है, लेकिन सरकारी अस्पताल और कोविड केयर सेंटर अलर्ट मोड पर ही रहेंगे। ताकि, अचानक मरीज बढ़ने पर दूसरी लहर वाली स्थिति न बने।
जिले के सबसे बड़े राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल जो कि कोविड मरीजों के लिए पूरी तरह से समर्पित किया गया था, वहां पर भी तीसरी लहरी की संभावना के मद्देनजर व्यवस्थाओं को और चुस्त-दुरुस्त किया जा रहा है। साथ ही दून अस्पताल के अंतर्गत आने वाले सबसे बड़े सरकारी कोविड केयर सेंटर रायपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भी ऑक्सीजन और अन्य सुविधाओं को विस्तार देने का काम चालू है।