चुनाव प्रचार गरमाने के लिए उतर रहे भाजपा के महारथियों के कदम शुक्रवार को अचानक ठिठक गए। प्रचार रथों पर सवार होने के बजाय वे बंद कमरों में चले गए और घंटों में मंत्रणा करते रहे। चुनाव के सटीक प्रबंधन की माहिर पार्टी के अचानक कार्यक्रम बदलने से सियासी हवाओं में चर्चाएं गर्मा उठी।
साथ ही सवाल भी तैरने लगे कि आखिर सरपट दौड़ रहे प्रचार में महारथियों के कदम क्यों ठिठक गए? कहीं न कहीं इसे डेढ़ दर्जन से ज्यादा सीटों पर उठी बगावत से जोड़कर देखा जा रहा है। जिस अप्रत्याशित तरीके से पार्टी के महारथी घंटों बंद कमरे में मैराथन बैठकें करते रहे, उसके यही सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं कि पार्टी वार रूम में डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाने में जुटी थी।
पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) रामलाल के संवेदनशील सीटों पर असंतोष की टोह लेने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय संगठन सहमंत्री वरिष्ठ नेता शिवप्रकाश, प्रदेश चुनाव प्रभारी जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू बुधवार को पार्टी कार्यालय से दूरी बनाकर रेस कोर्स स्थित एक आवास में दिनभर मंथन करते रहे।
प्रदेश चुनाव प्रभारी जेपी नड्डा की आधिकारिक तौर पर पार्टी ने सेहत खराब बताई, जिसके चलते उनकी तीन जनसभाएं बिना उनके पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने अकेले ही संभाली। यह नड्डा का पहला स्टार प्रचार अभियान था। उधर प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू को पार्टी कार्यालय में आकर समाजवादी पार्टी सहित अन्य कई संगठनों के दर्जन भर नेताओं को भाजपा में शामिल करवाने के कार्यक्रम तय था। जाजू तय कार्यक्रम में नहीं पहुंचे, उनकी जगह पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी ने नेताओं को पार्टी में शामिल करवाया।
सूत्रों की माने तो इन दिग्गजों के तय कार्यक्रम छोड़ मंत्रणा करना आगामी चुनावी रणनीति का खाका तैयार करने को लेकर था। राष्ट्रीय महामंत्री की ओर से मिले फीडबैक को इससे बैठक से जोड़ा जा रहा है। तमाम कोशिशों के बाद कुछ सीटों पर ही पार्टी डैमेज कंट्रोल कर पाई, जिससे एक दर्जन से अधिक सीटों पर असंतोष बना हुआ है। इसके अलावा भितरघात भी पार्टी के सामने बड़ी चिंता है।
प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने शुक्रवार को रानीखेत में इशारा भी किया कि टिकट कटने से जो बागी निर्दलीय मैदान में हैं उनको कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है। हालांकि भट्ट का यह बयान सियासी अधिक दिख रहा है, लेकिन इससे एक संकेत यह भी लगाया जा रहा है कि किसी न किसी स्तर पर निर्दलियों को समर्थन मिल रहा है। पार्टी के लिए यह बड़ी चिंता का विषय है। स्टार प्रचारकों के अभियान से ठीक पहले वॉर रूम में थिंक टैंक की मैराथन बैठक अंसतोष को थामने और भितरघात से निपटने को लेकर तैयार हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में भाजपा की ओर से कौन सा बड़ा दांव खेला जाता है।
भाजपा की चुनौती
भाजपा के लिए रानीखेत सीट पर प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के खिलाफ प्रमोद नैनवाल, काशीपुर में हरबजन सिंह चीमा के खिलाफ पूर्व राजीव अग्रवाल, नरेंद्रनगर में सुबोध उनियाल के खिलाफ ओमगोपाल रावत, केदारनाथ में शैलारानी रावत के खिलाफ आशा नौटियाल, गंगोत्री में गोपाल रावत के खिलाफ सूरत राम नौटियाल, डीडीहाट में बिशन सिंह चुफाल के खिलाफ किशन भंडारी, चौबट्टाखाल में सतपाल महाराज के खिलाफ कविंद्र ईष्टवाल, प्रतापनगर विजय सिंह पंवार के खिलाफ राजेश्वर पैन्युली, देवप्रयाग से विनोद कंडारी के खिलाफ दिवाकर भट्ट और सहसपुर में सहदेव पुंडीर के खिलाफ लक्ष्मी अग्रवाल की बगावत झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा कुछ और सीटें हैं जहां चुनौती बनी हुई है।