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गैरसैंण का उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनना तय : अजय भट्ट

Wed, 05 Dec 2018 10:36 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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ajay bhatt - फोटो : amar ujala
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गैरसैंण में विधानसभा सत्र को लेकर सुर्खियों में आए प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि ग्रीष्मकालीन राजधानी बनना तय है। गैरसैंण पर मुख्यमंत्री से जुदा राय होने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन सरकार में न तो मतभेद है न मनभेद। पार्टी ने जो कह दिया उसे पक्का समझा जाए। उधर, जीरो टॉलरेंस की सरकार में उनकी एफएल टू जांच के लिए किये पत्राचार के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होने के सवाल पर वे टाल-मटोल करते दिखे। कहा कि एक बार फिर सीएम से मिलेंगे। दायित्व आवंटन पर फंसे पेच पर उन्होंने साफ किया कि जल्द आयोगों में नियुक्तियां होने जा रहीं हैं। निकाय चुनाव के नतीजों से उत्साहित भट्ट का अगला लक्ष्य लोकसभा चुनाव है। प्रदेशाध्यक्ष ने अमर उजाला ब्यूरो प्रमुख अरुणेश पठानिया से बातचीत में संगठन-सरकार में समन्वय से लेकर भाजपा में मीटू प्रकरण और आगामी चुनावों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। 

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सवाल : गैरसैंण पर आपकी और मुख्यमंत्री की राय अलग क्यों है ?  
जवाब : गैरसैंण उत्तराखंड की आत्मा है। सत्र करवाने को लेकर विवाद कहीं से नहीं उपजा, न मेरी तरफ से न मुख्यमंत्री की तरफ से। मैंने सिर्फ इतना कहा कि इस बार सत्र नहीं हो रहा, उसकी वजह सुविधाओं की वहां कमी है। सरकार कहीं भी सत्र चलाए यह उसका विशेषाधिकार है, लेकिन यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि हमने सबसे पहले गैरसैंण को लेकर स्थिति साफ करने का मुद्दा कांग्रेस सरकार में उठाया, तब विपक्ष कोई जवाब नहीं देता था। जबकि हमारी सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की ओर बढ़ रही है। 

सवाल : गैरसैंण का स्वरूप तय करने से तो आपकी सरकार भी बच रही है? 
जवाब : मेरा केवल इस बात पर जोर है कि गैरसैंण में व्यवस्थाएं बने। दो दिन की जगह सरकार तीन महीने के लिए गैरसैंण में बैठे। यह मेरी व्यक्तिगत राय है। जिस गति से सरकार वहां काम कर रही है उससे जल्द वहां ग्रीष्मकालीन राजधानी लायक व्यवस्था तैयार हो जाएगी। पार्टी के दृष्टि पत्र में इसका उल्लेख है और पार्टी ने जो कह दिया उसे पक्का समझिये। गैरसैंण के ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने में अब अधिक समय नहीं लगेगा। इस दिशा में हम काफी आगे बढ़ गए हैं। सरकार पार्टी के वचन के अनुरूप कार्य कर रही है, लेकिन कांग्रेस ड्रामा कर रही है। 
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सवाल : जीरो टॉलरेंस वाली भाजपा सरकार में एफएल टू पर जांच क्यों नहीं ? 
जवाब : सरकार पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है। बडे़ मामले एक के बाद एक खुले हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों में पांच दर्जन अधिकारी कर्मचारी जेल में हैं। एफएल टू प्रकरण में सरकार को पत्र लिखा है। यह हमारा चुनावी मुद्दा रहा है। पत्र किस स्टेज पर है, किस कार्यालय में है, उसको लेकर मुख्यमंत्री से वार्ता करूंगा। पूरी उम्मीद है कि जल्द आवश्यक कार्रवाई होगी। 

सवाल : कार्यकर्ता बोल रहे हैं सरकार अध्यक्ष की नहीं मान रही तो हमारी क्या सुनवाई होगी ? 
जवाब : देखिये, सरकार के काम में संगठन कभी दखल नहीं करता और संगठन के काम में सरकार नहीं करती। हम आपस में समन्वय बनाते हैं। कोर ग्रुप की समय समय पर होने वाली बैठकों में कई विषयों पर चर्चा होती है। सरकार और पार्टी अलग नहीं है। जो पार्टी चाह रही है, उस पर काम हो रहा है। 

सवाल : फिर यह माना जाए कि संगठन और सरकार में मतभेद हैं? 
जवाब : सरकार और संगठन में कोई भेद नहीं है। एका है, जिसके चलते हम थराली उपचुनाव जीते और अब निकाय चुनाव में पांच निगमों के साथ सर्वाधिक सीटें हमारी आई। कोई विवाद नहीं हम एक दिशा में चलते हैं। कुछ मामलों पर तुरंत निर्णय होता है कुछ देरी से होते हैं, लेकिन सरकार और संगठन में मनभेद या मतभेद की स्थिति बिल्कुल नहीं है। हमारे कहने पर सरकार ने एनएच 74 की जांच की है। एफएल टू मामले पर भी काम होगा। वर्तमान में कई घोटाले सामने आए हैं, जिन पर कार्रवाई के लिए सरकार को संगठन ने बताया था। 

सवाल : भाजपा लगातार चुनाव जीत रही है, लेकिन सरकार में कार्यकर्ता की अनदेखी क्यों है? 
जवाब : ऐसा नहीं है। भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है। हमारे पास धनबल या बाहुबल नहीं बल्कि कार्यकर्ता हैं। कार्यकर्ताओं को सरकार में समाहित किया जाना है। सीमित दायित्वों पर तैनाती होनी है, जिस पर चर्चा हो चुकी है। अतिआवश्यक दायित्व जल्द दिये जाएंगे। 

सवाल : दायित्व आवंटन में देरी की वजह क्या है? 
जवाब : सरकार से पूरी वार्ता हो चुकी है। दायित्व के साथ दो मंत्री पद भी भरे जाएंगे। 50 से 60 दायित्व हैं जिनको दिया जाना है। यह बात सही है कि देरी की वजह से अफसरशाही  दायित्वधारियों की गैर मौजूदगी से अपने हिसाब से काम कर रही है। जल्द आयोगों के रिक्त पदों में तैनाती की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। फिर अन्य पद भरे जाएंगे। कई बार देरी होती है, लेकिन उसे अनदेखी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। 

सवाल : निकाय चुनाव के नतीजों का लोकसभा चुनाव चुनाव में कितना असर दिखेगा? 
जवाब : नतीजे उत्साहजनक हैं, परंतु हम अतिउत्साह में खुशी मनाते नहीं रहेंगे। अगला लक्ष्य लोकसभा चुनाव है। जनता का मूड हमें पता चल गया है। हम चुनाव के लिए तैयार हैं। हर स्तर पर हमारे कार्यक्रम गतिमान हैं। 

सवाल : दो निगमों के साथ डोईवाला मसूरी जैसी अहम सीट कैसे हारे ?  
जवाब : पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा है, भले ही दो निगमों और डोईवाला सहित कुछ अन्य जगह हम हारे। हार की समीक्षा की जा रही है। जहां कांग्रेस की जीत हुई उससे साफ है कि चुनाव निष्पक्ष हुए हैं। कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है, हम नहीं चाहते की वह खत्म हो जाए। हम डोईवाला हारे इसका मतलब है कि कहीं गड़बड़ नहीं हुई। कांग्रेस की सरकार होती तो ऐसा नहीं होता। 

सवाल : मीटू प्रकरण में अंदरूनी जांच से पार्टी क्यों बच रही है? 
जवाब : ऐसा नहीं है। प्रकरण सामने आते ही संगठन महामंत्री संजय कुमार ने पद छोड़ने की इच्छा जताई और पद छोड़ दिया। कांग्रेस बेवजह मामले को तूल देनी की कोशिश में लगी है। संजय अब पार्टी का हिस्सा नहीं है। अब जो भी आगे होगा वह स्वयं उससे निपटेंगे। उनके अलावा ऐसा कुछ नहीं है, जिसे पार्टी स्तर से किया जाना है।  

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