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भ्रष्टाचार के खिलाफ लाचार हुआ एक 'हथियार'

Sat, 28 Dec 2013 09:22 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में भाजपा सरकार के कार्यकाल में लागू सेवा का अधिकार दो साल के बाद बेकार हो गया है। राशन कार्ड से लेकर राजस्व रिकार्ड जैसी 70 नागरिक सेवाओं के निस्तारण को खंडूड़ी सरकार ने समयबद्ध कर जनता को अधिकार दिया, लेकिन अब उसका अमल तो दूर सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
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भाजपा सेवा के अधिकार को लोकायुक्त विधेयक से जोड़ कर मजबूत बनाना चाहती थी, जो अब कांग्रेस के लोकायुक्त बिल आने से अपने आप समाप्त हो गया।

ठंडे बस्ते में डाल दिया
सेवा का अधिकार अधिनियम अक्टूबर 2011 में लागू किया गया था। इसमें लगभग 70 नागरिक सेवाओं के कार्य को समयबद्ध किया गया था। लेकिन सरकार बदलते ही यह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके लिए विभागीय सचिव को अधिसूचित सेवाएं तथा समय सीमा का उल्लेख वेबसाइट पर करना था।

सभी कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर संबंधित अधिकारी का ब्यौरा, प्रदान की जाने वाली सेवा व उसके लिए जरूरी दस्तावेज और समय सीमा लगाना अनिवार्य किया गया। इसके अलावा पांच चरणों में अपील की प्रणाली विकसित की गई थी। यह सारी व्यवस्था अब सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है।
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राहुल हैं सेवा के अधिकार के पक्ष में
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली हार के बाद राहुल गांधी ने दिल्ली नागरिक सेवाओं के समयबद्ध निस्तारण के लिए सेवा के अधिकार की पैरवी की थी। राहुल ने लोकायुक्त बिल संसद सत्र में पास करवाने से पहले बुलाई पत्रकार वार्ता में कहा था कि जनता को नागरिक सेवाएं समय से मिलनी चाहिए।

समाधान में शिकायतों का हाल
सेवा के अधिकार को साइडलाइन कर कांग्रेस सरकार समाधान वेबपोर्टल लेकर आए, जिसमें जिला स्तर से लेकर निदेशालय और शासन को सीधा जनता की समस्याओं से आनलाइन जोड़ा।

जो हाल सेवा अधिकार का हुआ वही समाधान का हो गया है। समाधान में अब शिकायतें आना बेहद कम हो गई हैं।

शासन में 580 से 251 लंबित, 224 अस्वीकृत और 75 निस्तारित।निदेशालय स्तर पर 850 से 169 लंबित, 505 अस्वीकृत और 176 निस्तारित। जिलास्तर पर 1268 से 74 लंबित,  अस्वीकृत 288 और निस्तारित 901
सेवा के अधिकार के तहत हमारे समय में 95 फीसदी तक डिलीवरी सिस्टम बन गया था। भाजपा की सरकार हटते ही इसकी मानिटरिंग बंद हुई तो जनता अब दोबारा सुविधा शुल्क देने को मजबूर है। नागरिक सेवाओं के लिए जनता बिना पैसा दिए अपना काम नहीं करवा पा रही है, इससे बड़ी नाकामी किसी भी प्रदेश सरकार के लिए क्या हो सकती है।
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बीसी खंडूड़ी, पूर्व मुख्यमंत्री
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