सांसद बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड में पलायन की समस्या काफी भयावह बनती जा रही है। पहाड़ में गांव धीरे-धीरे खाली होते जा रहे हैं और राज्य की महान संस्कृति विलुप्ति के कगार पर है।
ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने राज्य की विशिष्ट संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने के लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि निर्जन गांवों को आबाद करने का यह प्रयास उत्तराखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगा। जो नौजवान रोजगार के लिए गांव छोड़ने को मजबूर हुए हैं, उनको वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराकर रिवर्स माइग्रेशन की जाएगी।
इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। उत्तराखंड के लाखों प्रवासी जो कि दिल्ली, लखनऊ, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में जाकर बस गए हैं, उनसे चर्चा कर गांव के पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया जाएगा।