फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंडः मोदी लहर भी नहीं रोक पाई हार की हैट्रिक

Tue, 13 Jan 2015 08:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड में भाजपा को 9 छावनी परिषद चुनावों में करारी हार ने पार्टी की प्रदेश में संगठनात्मक रणनीति के साथ स्थानीय विधायकों की पोल खोल दी है। पार्टी चुनाव चिन्ह पर सिर्फ भाजपा ने प्रत्याशी उतारे जबकि अन्य दल पर्दे के पीछे रहे।
विज्ञापन


राजधानी देहरादून में प्रदेश की दो सबसे बड़ी छावनियों गढ़ी और क्लेमेंटटाउन में तो पार्टी ग्राफ को बढ़ाना तो दूर वर्ष 2008 के प्रदर्शन को भी दोहरा नहीं पाई।

राज्य की किसी भी छावनी में भाजपा बोर्ड में अपना बहुमत लाने में विफल रही है। छावनी चुनाव के लिए पार्टी के दोहरे मापदंड हार का बड़ा कारण हैं। प्रत्याशियों उतारने से नेताओं के बीच गहराये मतभेद अब नतीजों में दिखे। इन्हीं मतभेदों के चलते कुछ छावनियों में प्रत्याशी तक नहीं उतारे गए।
विज्ञापन


हालांकि इस फैसले से कुमाऊं मंडल में लाज जरूर बच गई, जहां पार्टी चुनाव चिन्ह पर प्रत्याशी ही नहीं उतारे गए। उधर, गढ़वाल की किसी भी छावनी में पार्टी अपना उपाध्यक्ष बनाने की स्थिति में नहीं दिख रही है। चकराता कैंट में पार्टी पचास फीसदी वार्डों में जीत दर्ज कर पाई है, जबकि लंढौर (मसूरी) में भाजपा विधायक गणेश जोशी के हस्तक्षेप के बाद प्रत्याशी नहीं उतारे गए।

भाजपा विधायकों की साख पर सवाल

कैंट चुनाव के नतीजों से कई भाजपा विधायकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है। गढ़ी कैंट में भाजपा विधायक हरबंस कपूर को बड़ा झटका लगा है। कपूर के तीनों प्रत्याशी चुनाव हार गए। इसी कैंट के चार वार्ड भाजपा विधायक गणेश जोशी के विधानसभा क्षेत्र से हैं जहां जोशी ने अपने दबदबे से केवल दो ही जगह पर प्रत्याशी उतरने दिए।

जोशी समर्थित एक प्रत्याशी की जीत हुई जबकि दूसरी प्रत्याशी तो वहां बागी से पीछे रही। लढ़ौर में जोशी ने प्रत्याशी नहीं उतारने दिए। लैंसडोन कैंट भाजपा विधायक दिलीप सिंह रावत के क्षेत्र में आता है जहां भाजपा पांच से चार जगह हारी।

प्रदेश में लगातार तीसरी बार भाजपा को झटका
भाजपा के प्रदेश में लगातार झटके लग रहे हैं। हाल ही में विधानसभा उपचुनावों में तीन सीटें हारी है। नगर निकायों के वर्ष 2013 में हुए चुनावों में भी भाजपा पिछले चुनावों के मुकाबले स्थिति नहीं सुधार पाई थी। सितंबर 2013 में पंचायत चुनावों में भाजपा ने पार्टी चुनाव चिन्ह पर प्रत्याशी उतारे लेकिन वहां भी परिणाम विपरीत रहे।
विज्ञापन

कांग्रेस की चतुराई काम आई

कांग्रेस ने पंचायत चुनावों के बाद छावनी परिषद चुनावों में भी पार्टी चुनाव चिन्ह पर प्रत्याशी नहीं उतारे। इन चुनावों में पार्टी से अधिक मतदाता के व्यक्तिगत हावी रहते हैं। पार्टी का मानना है कि ऐसे में कैडर वोट को बांधे रखना आसान नहीं होता। अब गैर भाजपा प्रत्याशी को कांग्रेस अपने खाते में डालने की कोशिश करेगी। पार्टी क्लेमेंटटाउन और गढ़ी के अलावा चकरौता, लैंसडोन, रुड़की में अपना बोर्ड गठित करने में जुट गई है।

छावनी-------------वार्ड-----भाजपा प्रत्याशी---------जीत
गढ़ी (देहरादून)---------8-----------6-----------------------2
क्लेमेंटटाउन------------7-----------5-----------------------2
लढ़ौर------------------6-----------नहीं उतारे---------------0
चकराता---------------6-----------6-----------------------3  
लैंसडोन----------------6-----------5-----------------------1
रुड़की------------------5-----------4-----------------------2
रानीखेत----------------7-----------नहीं उतारे---------------0
नैनीताल----------------2-----------नहीं उतारे---------------0
अल्मोड़ा----------------2-----------नहीं उतारे----------------0
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें