आज गुजरात में कपास किसानों के लिए 100 प्रतिशत सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, जबकि विदर्भ में मात्र 9 प्रतिशत है। इसका परिणाम यह है कि कृषि क्षेत्र में विदर्भ में किसानों की आत्महत्या की दर सर्वाधिक है।
देश की संसदीय चुनाव प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए वरुण गांधी ने कहा कि हमें नॉर्वे व अन्य यूरोपीय देश से प्रेरणा लेकर अपने देश में भी में चुनाव प्रणाली में कुछ आवश्यक संशोधन करना चाहिए। इस मुद्दे पर उन्होंने पेटिशन सिस्टम और हस्ताक्षर अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां केवल चार दिन का चुनाव होता है, जिसमें विज्ञापन, पोस्टर, बैनर, सभा सभी पर रोक है।
प्रत्याशी घर-घर जाकर अपनी बात बताते हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत में भी कुछ ऐसा नया हो तो बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा। साथ ही अगर पेटिशन सिस्टम आएगा, जो दुनिया के 60 देशों में अस्तित्व में है तो संसद को मजबूर होकर अगले सत्र में जनता के मुद्दे पर बहस करवानी पड़ेगी। उन्होंने संस्थान में चंदन का पौधा रोपा। इस मौके पर हम के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, डॉल्फिन के चेयरमैन अरविंद गुप्ता, प्राचार्य डॉ. शैलजा पंत, निदेशक डॉ. अरुण कुमार सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
वरुण गांधी ने किसानों की कर्ज माफी की हिमायत की। उन्होंने कहा कि यदि बैकों में एनपीए है तो यह 70 करोड़ किसानों के कारण नहीं है। जिन पर कुल एनपीए का मात्र 19 प्रतिशत कर्ज है। कुल उनके कर्ज का 30 गुना मात्र 50 बड़े कारपोरेट घरानों पर है।
उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा तथा यूपी के किसान पराली जलाने को मजबूर हैं क्योंकि इसके लिए प्रति एकड़ उन्हें जुर्माने के रूप में 2500 रुपये चुकाने पड़ते हैं जबकि इसके जैविक उन्मूलन या कटाई का खर्च 6000 रुपये प्रति एकड़ है।
उन्होंने चिपको आंदोलन को सशक्त आंदोलन बताते हुए चंडी प्रसाद भट्ट तथा सुंदरलाल बहुगुणा के योगदान को याद किया। कहा कि जिस प्रकार यह आंदोलन सफ लतापूर्वक चलाया गया उसी प्रकार प्लास्टिक प्रदूषण, नदियों, पर्यावरण, सड़कों और अन्य समस्याओं के निवारण के लिए लोगों को जोड़ा जा सकता है। शिक्षा में बदलाव के लिए उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगार युवाओं को आगे आने का आह्वान किया।