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भाजपा मंत्री के इस बयान से उठा महिला खिलाड़ियों की अस्मिता पर सवाल, लेकिन अब मंत्री चुप

Wed, 27 Dec 2017 10:51 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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Arvind Pandey
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महिला खिलाड़ियों के यौन शोषण से जुडे़ उत्तराखंड खेल मंत्री अरविंद पांडेय के बयान से राज्य में सियासी तूफान खड़ा हो गया है।
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विपक्ष इस मुद्दे को लेकर हमलावर मुद्रा में आ गया है या यूं कह लें कि मंत्री ने बैठे-बिठाए विपक्ष को हमले का एक मौका दे दिया। हर कोई शिक्षा मंत्री से इस मामले को दबाने की वजह पूछ रहा है। कांग्रेस ने इस मामले को राज्य की बेटियों और उत्तराखंड के अस्मिता का सवाल बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

सीधे तौर पर आरोप भी लगा रहे हैं कि मंत्री ने दबाव बनाने के लिए यह शिगूफा छोड़ा है। राजनीति से दूर आम लोग भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उधर मंत्री अरविंद पांडेय एक निजी कार्यक्रम में शरीक होने चंडीगढ़ गए हैं। कई बार पूछने पर भी उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उनकी यह खामोशी कई और सवाल खड़े कर रही है।
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खेल मंत्री अरविंद पांडेय के दावे

molestation
बीते दिनों खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने एक निजी चैनल से बातचीत में दावा किया था कि खेल संघों में काबिज कुछ लोग महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण कर रहे हैं।

यह भी दावा किया था कि उनके पास ऐसी जानकारी भी है, जिसके आधार पर संघों के पदाधिकारियों के खिलाफ बलात्कार जैसा संगीन आरोप भी पुख्ता होता है। मंत्री ने इससे संबंधित सुबूत भी अपने पास होने की बात कही थी। मंत्री अरविंद पांडेय का यह बयान बहुत जल्द मीडिया में छा गया।

‘अमर उजाला’ ने मंगलवार को यह सवाल खड़ा किया कि आखिरकार आवश्यक सबूत होने के बावजूद मंत्री इस मामले में एफआईआर करने के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं? वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी इस बाबत मीडिया ने सवाल किए तो उन्होंने कहा कि पीड़ित खिलाड़ी सामने आए तो वह कार्रवाई करेंगे। हैरानी की बात यह है कि राज्य मंत्रिमंडल का एक वरिष्ठ मंत्री रेप जैसे संगीन अपराध के सबूत दबाए बैठे हैं। पूरे मामले पर अरविंद पांडेय से बात करने की तमाम कोशिशें बेकार हुईं। बस इतना पता चला कि वे चंडीगढ़ गए हैं।
 
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यह है मंत्री पांडेय का पूरा बयान

arvind pandey
‘कई बच्चे हैं, जिनका जीवन बर्बाद किया है इन्होंने। इन संघों से जुड़े कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने कई बच्चियों के साथ उनका जीवन तक बर्बाद किया है इन्होंने। मैं खुलकर शब्दों में बोल नहीं पा रहा हूं। मेरे पास सबूत हैं, इन संघों के कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके खिलाफ 376 तक का मुकदमा लिखवाऊंगा मैं। कई बच्चियों के साथ अनैतिक काम किया है इन लोगों ने। सारे सबूत मैंने इकट्ठा कर लिया है, तब बोल रहा हूं मैं। बर्बाद करके छोडू़ंगा इन लोगों को। जैसे इन लोगों ने उत्तराखंड के क्रिकेट के बच्चों का जीवन चौपट किया है, वैसे ही इनको साबुत नहीं छोड़ूंगा मैं। चकनाचूर करके छोड़ूंगा मैं। अगर ये अभी भी अपनी गलत हरकतों से बाज नहीं आए। अपनी गुंडागर्दी मचाने के लिए, अपनी दबंगई दिखाने के लिए, अपनी एसोसिएशन को आगे करने के लिए उत्तराखंड को इन लोगों ने चौपट किया है। मैं किसी कीमत पर किसी हद तक भी जा सकता हूं’।

मैं गुजरात से आज ही लौटा हूं, तो इस पूरे मामले की जानकारी मिली। शिक्षा मंत्री अपने किसी कार्यक्रम से बाहर हैं, उनके लौटने पर मैं उनसे पूरी बात पता करूंगा। जहां तक कार्रवाई की बात है, उसमें शिकायतकर्ता को सामने आना ही पड़ेगा क्योंकि यह कानूनी बाध्यता भी है। यदि सरकार किसी अधिकारी या संघ पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेगी, तो ऐसे में कार्रवाई के पीछे की वजह तो बतानी ही पड़ेगी। हां, यह बात जरूर है कि यदि शिकायतकर्ता चाहेगा तो उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
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