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मुन्ना चौहान की कांग्रेस को चुनौती, सूर्यधार में साबित करें सीएम की जमीन, दोनों दे देंगे इस्तीफा

Wed, 22 May 2019 08:17 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला
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सूर्यधार झील परियोजना को लेकर कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का बचाव किया।

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उन्होंने चुनौती दी कि कांग्रेस मुख्यमंत्री और उनके परिवार की एक इंच जमीन सूर्यधार में साबित कर दे तो वे विधानसभा की सदस्यता से और मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को सरकार के खिलाफ षड़यंत्र करार दिया।

चौहान प्रदेश भाजपा पार्टी कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने माना कि वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और संजय गुप्ता की पत्नियों के नाम पर चामासारी में संयुक्त रूप से जमीन खरीद हुई थी।
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उन्होंने कहा कि इस संपत्ति का जिक्र मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव में नामांकन पत्र के दाखिल शपथ पत्र में भी किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त रूप से जमीन खरीदी जा सकती है। संजय गुप्ता से सीएम के संबंध के सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरी आपसे भी जान पहचान है।  

इस भूमि को सूर्यधार झील प्रोजेक्ट से जोड़ने को उन्होंने कांग्रेस की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में अपनी तयशुदा हार के चलते झेंप मिटाने के लिए मनगढ़ंत कहानियां बना रही है।

इसे उन्होंने मुख्यमंत्री के चरित्रहनन की कोशिश करार दिया। चौहान ने कहा कि सूर्यधार और चामासारी के मध्य करीब 30 किमी का फासला है।  पत्रकार वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. देवेंद्र भसीन, प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र सिंह बिष्ट, सह मीडिया प्रभारी शादाब शम्स व मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी धीरेंद्र पंवार उपस्थित थे।

संजय गुप्ता ने 2016 में जमीन खरीदी, सरकार किसकी थी?
चौहान ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि जिस सूर्यधार में संजय गुप्ता की जिस भूमि का जिक्र कांग्रेस कर रही है, उसकी पहली रजिस्ट्री आठ नवंबर 2016 की थी। उन्होंने सवाल कि 2016 में सरकार किसकी थी?  उन्होंने कहा कि सूर्यधार परियोजना 2014-15 में शुरू हुई।

इसकी सैद्धांतिक स्वीकृति 2016 में हुई। उस समय सरकार किसकी थी? क्या 2016 में त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री थे? इसका मतलब यह माना जाए कि संजय गुप्ता से कांग्रेस ने जमीन खरीदवाने का कार्य किया। 2017-18 में दो रजिस्ट्री दिखाई गई, जिनसे मुख्यमंत्री के परिवार का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। 

मुख्यमंत्री ने 18 करोड़ की डकैती रोकी
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री की सजगता की वजह से सूर्यधार प्रोजेक्ट में 18 करोड़ रुपये की डकैती रोकने का काम हुआ। कांग्रेस सरकार में प्रोजेक्ट की डीपीआर की लागत 48 करोड़ रुपये थी। जब त्रिवेंद्र सरकार आई तो इसकी निविदा को निरस्त कर दिया गया। 48 करोड़ के प्रोजेक्ट में कटौती कर इसे 30 करोड़ तक लाया गया। बांध की ऊंचाई भी दो मीटर बढ़ा दी गई।
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क्या ये मान लें कि तत्कालीन सीएम संलिप्त थे
चौहान ने कहा कि कांग्रेस को राह चलते लोगों के बयानों के आधार पर बातें करना शोभा नहीं देता है। उन्होंने पूर्व कांग्रेस में मुख्यमंत्री की ओएसडी रही अरुणा कुमार के संबंध में अखबार में छपी खबर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने ठगी की है। क्या ये माना जाए कि इस ठगी में उन्हें नियुक्त करने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री संलिप्त हैं?

मुख्यमंत्री ने गांव वालों से कहा था जमीन मत बेचना
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने थानो में एक कार्यक्रम में ग्रामीणों से आह्वान किया था कि वे अपनी जमीन नहीं बेचें। इसके पक्ष में उन्होंने अमर उजाला में प्रकाशित खबर की कटिंग दिखाकर मुख्यमंत्री के भाषण की ऑडियो भी सुनाई।

कांग्रेस को मुंह छुपाने को अंधेरा कोना नहीं मिला
चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर तंज किया कि उनकी ना समझी और मूर्खतापूर्ण बयान पर केवल दया ही आ सकती है। उन्होंने कहा कि त्रिवेंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस तरह से जीरो टॉलरेंस के तहत कार्रवाई की है, ये उसकी बौखलाहट है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लग गया है चुनाव में उसका सफाया हो गया। मुंह छिपाने को उसे अंधेरा कोना नहीं मिल रहा। इसलिए छत पर चढ़कर वह मूर्खता और फरेब से सहानुभूति जुटाने की कोशिश कर रही है।
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