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उत्तराखंड विस चुनावः बागियों को लेकर भाजपा में फिर कसमसाहट

Wed, 08 Mar 2017 12:24 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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कांग्रेस के नौ बागियों ने भाजपा की सदस्यता ले ली। - फोटो : file photo
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राज्य में सत्ता में आने का ख्वाब देख रही भाजपा में बागियों को लेकर एक बार फिर कसमसाहट शुरू हो गई है। पार्टी प्रदेश में सरकार बनने को लेकर आश्वस्त तो है मगर साथ ही उसके नेता बागियों को तरजीह दिए जाने को लेकर आशंकित हैं। भाजपाइयों को ये सवाल शिद्दत से मथ रहा है कि सरकार बनने के बाद कहीं बागियों का पलड़ा तो भारी नहीं हो जाएगा। चिंता पार्टी के उन दिग्गजों को ज्यादा सता रही है, जो मंत्री बनने का अरमान पाले हुए हैं।
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 पूर्ण बहुमत का आंकड़ा छूने की स्थिति को लेकर पार्टी में चल रहे मंथन में सीएम और उनके मंत्रिमंडल की शक्ल में बागियों का अक्स दिखने लगा है। हालांकि एक धड़े का यह भी मानना है कि बहुगुणा कैंप की जो मजबूत स्थिति 18 मार्च के बाद प्रचार और टिकट आवंटन में रही,अब वैसा नहीं है। अगर पार्टी सरकार नहीं बना पाएगी तो पुराने दिग्गज इसका ठीकरा बागियों पर फोड़ कर उनके आने पर सवाल खड़े करने की फिराक में हैं।

जानकारों की मानें तो बहुमत का आंकड़ा भाजपा के पक्ष में आया भी तो सीएम चेहरा कौन बनेगा यह अभी तय नहीं है। हालांकि कई नामों पर चर्चा तेज है, जिसमें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सतपाल महाराज, पुराने दिग्गजों में अजय भट्ट, त्रिवेंद्र रावत, प्रकाश पंत और धनसिंह रावत जैसे नाम उछाले जा रहे हैं। सीएम के चेहरे के साथ मंत्रिमंडल की शक्ल कैसी रहेगी, इसे लेकर भी पार्टी नेता उलझन में हैं।
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सबसे बड़ी चिंता कांग्रेस से आए बागियों को लेकर

हरक सिंह रावत - फोटो : file photo
चुनाव की रणनीति तैयार करने में जिस तरह केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश संगठन की भूमिका केवल भीड़ जुटाने भर की तय की थी, उससे लगता है कि सरकार बनने के बाद सीएम समेत उनका मंत्रिमंडल भी दिल्ली से तय होगा। ऐसे में पुराने नेताओं की सबसे बड़ी चिंता कांग्रेस से आए बागियों को लेकर है।

बहुगुणा कैंप में हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, शैलेंद्र मोहन सिंघल, सुबोध उनियाल जैसे कई बड़े नाम हैं, जिनके जीतने के बाद सरकार बनने की स्थिति में उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। महाराज इस कैंप का हिस्सा नहीं माने जाते हैं। भाजपा के बहुमत में आने की स्थिति में सीएम समेत 11 मंत्रियों की सूची में कितने नाम कांग्रेस से आए बागियों के होते हैं, इसको लेकर पुराने भाजपाइयों में संशय की स्थिति है।

हालांकि भाजपा के सूत्र बताते हैं कि बागियों की स्थिति चुनाव परिणाम आने के बाद और स्पष्ट हो जाएगी। अगर पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में आती है तो यह भी जरूरी नहीं है कि पुराने भाजपा नेताओं की अनदेखी कर बागियों को तरजीह मिले। बहुगुणा कैंप के पूर्व मंत्रियों के अलावा अन्य किसी को एडजस्ट नहीं किया जाएगा। अगर पार्टी सरकार नहीं बना पाती है तो यह भी अहम रहेगा कि बागियों के आने से बागी हुए भाजपाइयों से पार्टी को कितना नुकसान हुआ।
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सीएम से लेकर मंत्रीपद के लिए दिल्ली की दौड़

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : file photo
यूपी में प्रचार अभियान समाप्त होने के बाद अब केंद्रीय नेतृत्व का नतीजों तक दिल्ली में वार रूम बनेगा। जीत हार की स्थिति पर पार्टी की अगली रणनीति क्या रहेगी, इसका संचालन वहीं से होना है।

जीतने की स्थिति में सीएम का चेहरा कौन होगा इसका फैसला नतीजे आने के दो दिन के भीतर हो जाएगा। होली के तुरंत बाद सरकार बननी है, जिससे मंत्रिमंडल के चेहरे भी तुरंत तय होने हैं।

ऐसे में दिग्गज दिल्ली की दौड़ लगा कर अपनी जुगत भिड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हार की स्थिति में पार्टी का रणनीति भी नतीजों से पहले तय हो जाएगी। इसके बाद संगठन में व्यापक फेरबदल किये जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। हालांकि चुनाव परिणाम आने से एक दिन पहले प्रदेश प्रभारी दून में डेरा डाल देंगे।
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