पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के हरिद्वार से सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई डोईवाला विधानसभा सीट पर जल्द ही उपचुनाव होने वाला है।
लेकिन उपचुनाव से पहले पंचायत चुनाव में भाजपा को यहां तगड़ा झटका लगा है। डोईवाला ब्लाक की छह जिला पंचायत सीटों में से सिर्फ दो पर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी जीत सके हैं।
बाकी चार पर कांग्रेस और उसके समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं। उधर, करारी हार के बाद पार्टी में पराजय की वजहों पर घमासान मच गया है।
डोईवाला ब्लाक की चक तुनवाला जिला पंचायत सीट पर भाजपा ने शशि रावत को प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन यहां निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य हेमा पुरोहित ने फिर कब्जा कर लिया।
भाजपा प्रत्याशी को बड़े अंतर से शिकस्त
मारखम ग्रांट द्वितीय से भाजपा की नगीना रानी को कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी टीना सिंह से 7200 मतों के बड़े अंतर से शिकस्त मिली है।
पूर्व ब्लाक प्रमुख होने के बावजूद नगीना यहां तीसरे स्थान पर रहीं। डैंसवाला में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी धर्मपाल सिंह और अठूरवाला से पुरुषोत्तम भी हार गए।
पार्टी सिर्फ माजरी माफी और रानीपोखरी ग्रांट पर जीत हासिल कर सकी है। माजरी माफी में पुष्पा बड़थ्वाल और रानीपोखरी में मीता रावत विजयी रहीं।
भाजपा को अब यहां विधानसभा उपचुनाव में भी उतरना है। ऐसे में पंचायत चुनाव को सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा था। इस चुनाव में हार से पार्टी में गुटबाजी उभर गई है।
सूत्रों के अनुसार डोईवाला के निवर्तमान विधायक और हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक और इसी सीट पर विधायक रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच 36 का आंकड़ा रहा है।
अंदरखाने दोनों के समर्थक एक-दूसरे को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने की जुगत में जुटे रहते हैं। त्रिवेंद्र सिंह रावत उपचुनाव में इस सीट पर दावा पेश कर सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र में जनसंपर्क भी शुरू कर दिया है।
समर्थक राह में बिछाते रहेंगे कांटे
सूत्रों के मुताबिक रावत भले ही टिकट के बेहतर दावेदार हों, लेकिन निशंक के समर्थक उनकी राह में कांटे बिछाते रहेंगे।
अंदरखाने चल रही इस लड़ाई में फिलहाल निशंक समर्थकों ने खुद को आगे साबित किया है। बताया जा रहा है कि पंचायत चुनाव में हारे चारों प्रत्याशी रावत समर्थक थे।
यह भी कहा जा रहा है कि निशंक समर्थकों ने त्रिवेंद्र खेमे की हार पुख्ता करने के लिए इन सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए थे।
उधर, पूर्व ब्लाक प्रमुख नगीना रानी तो खुलकर कहने लगी हैं कि उन्हें निशंक समर्थकों ने हराया है। ऐसे में उपचुनाव से पहले दोनों गुटों में तनातनी बढ़ गई है।
शनिवार देर रात तक घोषित परिणामों में कुमाऊं मंडल में भी भाजपा की हालत ठीक नहीं रही। नैनीताल जिले में ही भाजपा के 26 में से केवल नौ प्रत्याशी ही जीत पाए।
उपचुनाव वाली तीन सीटों में से दो धारचुला और सोमेश्वर के नतीजे भी भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। हालांकि भाजपा ने सभी सीटों पर अपने अधिकृत प्रत्याशी नहीं उतारे थे।
उपचुनाव भाजपा के लिए खासे चुनौतीपूर्ण
देर रात तक राज्य निर्वाचन आयोग जिला पंचायत सदस्य पद के करीब 70 प्रतिशत परिणाम घोषित कर पाया था।
उधमसिंहनगर और देहरादून की अधिकतर सीटों के परिणाम आने बाकी हैं। दूसरी ओर ग्राम प्रधानों के 98 प्रतिशत और क्षेत्र पंचायत सदस्यों के 93 प्रतिशत परिणाम घोषित किए जा चुके थे।
लोक सभा चुनाव में कांग्रेस का सफाया करने वाली भाजपा के इस जमीनी चुनाव में पीछे रह जाने का अर्थ यह निकाला जा रहा है कि प्रदेश में मोदी मंत्र का सम्मोहन कुछ कम हुआ है।
ऐसे में आगे आने वाले तीन उपचुनाव भाजपा के लिए खासी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अधिकृत प्रत्याशी भले ही न उतारे हों पर चुनाव कई दिग्गजों की हालत को पस्त करने वाला भी साबित हुआ है।
जाहिर है कि मतदाताओं का विश्वास जीतने में कांग्रेस को भी कम पसीना नहीं बहाना होगा। नतीजों में निर्दलीयों का बोलबाला दिख रहा है।
अल्मोड़ा में कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत भले ही बता रही हो पर कांगेस से जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदार को ही यहां हार का मुंह देखना पड़ा है। इसी तरह गढ़वाल में विधायक शूरवीर सजवाण की पत्नी अंबिका सजवाण भी हार गईं।
हालांकि विधायक राजेंद्र भंडारी, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, धारचुला के पूर्व विधायक हरीश धामी आदि की पत्नियों के जीतने से कांग्रेस यह दावा कर रही है कि सोमेश्वर में उसकी स्थिति मजबूत हुई है।