दरअसल, मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से ही कर्णवाल और चैंपियन ने दोस्ती की शुरुआत की। उन्होंने देहरादून में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में सभी गिले शिकवे भुलाकर नव वर्ष में रिश्तों की नई शुरुआत की घोषणा की थी। उन्होंने सार्वजनिक मंच से घोषणा की थी कि वे एक दूसरे पर दायर मुकदमे वापस लेंगे।
मुकदमों की एक सूची भी उनकी ओर से जारी हुई। अब कर्णवाल कह रहे हैं कि चैंपियन मुकदमा वापस लेने से पीछे हट रहे हैं। लिहाजा उनके पास अब सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के दरवाजे पर दस्तक देने के सिवाय कोई चारा नहीं है। मुकदमा वापस न हो पाने को लेकर चैंपियन के अपने तर्क हैं।
उनका कहना है कि मुकदमा चूंकि उनके द्वारा दर्ज नहीं किया गया है, इसलिए इसके वापस लेने में देरी हो रही है। चैंपियन की ओर से कर्णवाल पर फर्जी जाति प्रमाण की सीबीआई जांच समेत चार मुकदमे वापस लिए जाने हैं। करीब इतने ही मुकदमे कर्णवाल को वापस लेने हैं। लेकिन मुकदमा वापसी को लेकर दोनों नेताओं के बीच फिर से पंगा होने के आसार बन गए हैं।
खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन ने कहा कि उन्हें भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल की वजह से पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया। उनके निष्कासन की वजह दूसरी थी, जिस पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी के निर्देश पर कार्रवाई हुई।
चैंपियन समझौते से पीछे हट रहे हैं। मैंने उनसे मुकदमा वापस लेने के बारे में बात की। लेकिन उनका कहना है कि मुकदमा उन्होंने नहीं किया है, इसलिए उसे वे वापस नहीं ले सकते। मैंने तय किया है कि इस मामले को मैं मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष से उठाऊंगा।
- देशराज कर्णवाल, भाजपा विधायक, झबरेड़ा
मैं क्षत्रिय हूं और मैंने जो वादा किया है उसे पूरा करूंगा। जिस व्यक्ति ने कर्णवाल पर मुकदमा किया है, उसके अधिवक्ता मुकदमा वापस लेने को राजी नहीं है। अधिवक्ता को बदल कर मुकदमा वापस लिया जाएगा।
- कुंवर प्रणव चैंपियन, विधायक, खानपुर