बैठक 11 बजे शुरू होनी थी, लेकिन सचिव ने कार्यक्रम में व्यस्तता के चलते इसे 12 बजे करने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद मंत्री अपने कक्ष में सचिव के आने का इंतजार करते रहे।
अनुसचिव और अपर सचिव (परिवहन) मंत्री को सफाई देते रहे कि सचिव बस पहुंचने ही वाले हैं। जब अपर सचिव ने बताया कि सचिव साहब बैठक में पहुंच गए है तो मंत्री ने कहा कि अब उन्हें इंतजार करने दे।
इसके बाद बैठक में पहुंचते ही यशपाल आर्य ने सचिव को जमकर खरीखोटी सुनाने के साथ उनके एसडीएम रहते हुए पुराने विवाद की याद भी दिलाई। कैसे तत्कालीन एनडी तिवारी सरकार के समय रुड़की के विधायक उनसे नाराज होकर विधानसभा में विशेषाधिकार हनन का मामला लाने वाले थे और तब उन्होंने (विधानसभा अध्यक्ष) रहते हुए उनके शुरुआती करियर को देखते हुए मदद की थी।
बैठक में परिवहन मंत्री का रुख देखते हुए अफसरों को सांप सूंघ गया। जब विभागीय मंत्री की नाराजगी के संबंध में परिवहन सचिव से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया।