सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए भाजपा ने शाह से जो मंत्र लिया वह काम कर गया। मोदी के इस मॉडल पर चलकर ही बीजेपी ने उत्तराखंड में शानदान जीत हासिल की।
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फाइल फोटो: नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए भाजपा को मोदी के सुशासन मॉडल के प्रचार फॉर्मूले ने दो तिहाई बहुमत दिला दिया। प्रचार रणनीति में मतदाताओं को केंद्र सरकार के ढाई साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को बताने की बात काम कर गई। सीएम हरीश रावत को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा ने घेरकर स्थानीय मुद्दे गायब कर वन रैंक वन पेंशन, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी, उज्जवला, जनधन जैसी योजनाओं को इस तरह परोसा कि 45 प्रतिशत से अधिक का मतदान अपने पक्ष में कर लिया।
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बीसी खंडूड़ी
- फोटो : AmarUjala
प्रचार की रणनीति को टीम शाह ने अपने हाथ में रखकर प्रदेश संगठन को केवल भीड़ जुटने के लिए इस्तेमाल किया। पुराने चेहरों खंडूड़ी, निशंक, कोश्यारी की सीमित भूमिका कर केंद्रीय नेताओं को प्रचार अभियान में झोंकने की रणनीति पर उठने वाले सवालों पर जीत ने विराम लगा दिया है।
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हरीश रावत
- फोटो : ANI
उत्तराखंड में इस बार कांग्रेस और भाजपा का चुनाव प्रचार अभियान का फार्मूला पिछले चुनावों से अलग है। भाजपा ने राज्य सरकार को केवल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा, जबकि उपलब्धियों में केंद्र सरकार का जमकर गुणगान हो रहा है। भाजपा ने प्रचार में ऐसा ताना बना बुना कि सीएम हरीश रावत अपनी एकला चलो की नीति के कारण उसमें फंसते चले गए। कांग्रेस का रावत बनाम मोदी चुनाव करने का फार्मूला भाजपा की रणनीति का हिस्सा था, जिसे उसने केंद्रीय नेताओं की मदद से कारगर कर दिखाया।
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हरक सिंह रावत
- फोटो : AmarUjala
प्रचार के फ्रंट पर रावत रावत सरकार जिन केंद्र पोषित योजनाओं की फंडिंग का मसला उठा रहे हैं, उसके जवाब में भाजपा केंद्र से मिलने वाले आंकड़ों की बाजीगरी से मात देने में कामयाब रही। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत और अमृता रावत आदि कांग्रेस नेताओं के भाजपा में आने से पार्टी केवल बीते ढाई वर्ष के रावत कार्यकाल पर टारगेट कर रही है।
बहुगुणा कार्यकाल में सिडकुल भूमि घोटाला, टिहरी विस्थापितों को भू आवंटन और आपदा जैसे बड़े मामलों पर भाजपा ने सदन से सड़क तक उठाए थे, लेकिन अब चुनाव प्रचार में जब यह मुद्द उठे तो भाजपा के प्रदेश लीडरशिप से सफाई दिलवाई गई कि यह जांच में सब बेदाग साबित हुए। मंत्री हरक सिंह और अमृता रावत से जुड़े विवादों पर भी भाजपा ने खमोशी बरत मुद्दों को पलटवार की संभावनाओं को खत्म किया।