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बिरजू महाराज की ताल बनी धड़कन

Wed, 04 Dec 2013 04:38 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून में एक कार्यक्रम में बिरजू महाराज ने अलग-अलग तालों पर प्रस्तुति दी तो हॉल तालियों से गूंज उठा। महाराज ने नृत्य से पहले माइक पर कहा कि घुंघरू नाजुक है, जरा ध्यान से सुनना ये क्या कहते हैं।
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दून में पहली बार एक ही मंच पर कई हस्तियां जुटीं। मंगलवार को राजपुर रोड स्थित सैंट जोजफ्स एकेडमी में विराम बैठक के तहत स्वरांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर एक ही मंच से स्वर और नृत्य की वर्षा हुई।

जुगलबंदी पर जमकर तालियां गूंजी
कार्यक्रम की शुरुआत में एक ओर तबले पर कुमार बोस अलग-अलग ताल दे रहे थे तो दूसरी ओर शिवमणि कमाल दिखा रहे थे। दोनों की जुगलबंदी पर जमकर तालियां गूंजी। शिवमणि कभी घुंघुरू को पानी में डूबोते तो कभी थाली बजाते।
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इस जुगलबंदी के बीच बिरजू महाराज के पुत्र पंडित दीपक महाराज ने नृत्य किया। घुड़चाल के माध्यम से उन्होंने नृत्य की अलग-अलग विधाएं प्रस्तुत कीं। इस बीच मंच पर पहुंचे पंडित राजन-साजन मिश्रा।

उन्होंने राग बागेश्वरी में तराना छेड़ते हुए बादर की धमक सुनी जबसे लाइनों से शुरुआत की तो दर्शक झूम उठे। इसके बाद महाराज घराने की ठुमरी काह करू देख गारी देत कन्हाई गाई। अंत में जब बिरजू महाराज पहुंचे तो मंच एक साथ हस्तियों से सजा हुआ दिखाई दिया।

बिरजू महाराज ने ताल को परिभाषित करते हुए कहा कि ताल में 16 मात्राएं होती हैं। पहली मात्रा कृष्ण है और 15 गोपियां। ताल तो हमारी धड़कन है जो सोते-जागते धक-धक करती है। महाराज ने राग बागेश्वरी, रूपक ताल में नृत्य किया।

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उन्होंने कहा कि संगीत में आनंद भी आता है और संघर्ष भी। संगीत संघर्ष की पूरी तस्वीर पेश करता है। इस मौके पर एसएसपी केवल खुराना, पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, एमसी जोशी आदि उपस्थित थे।

मिला सम्मान
इस मौके पर पांच लोगों को सम्मानित किया गया। लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे थे। इस दौरान शुचित नारंग, चंद्रशेखर तिवारी, हरिकृष्ण शाह, मनोज कुमार मिश्रा को सम्मानित किया गया।

दून से है पुराना नाता
बिरजू महाराज ने कहा कि मेरा दून से पुराना नाता है। मेरे पिताजी कुछ समय यहां रहे। मैं भी यहां रहा, तब मैं ढाई साल का था। आज मेरी यादें ताजा हो गईं। उन्होंने कहा कि सुर-संगीत से तो मीरा भी तर गईं और सूरदास, चैतन्य महाप्रभु भी।

डीएम ने खरीदा टिकट
सैंट जोजेफ्स एकेडमी में आयोजित स्वराजंलि कार्यक्रम के लिए पांच सौ से लेकर पांच हजार तक टिकट रखे गए थे। आयोजकों का कहना था कि इस कार्यक्रम से मिलने वाला पैसा आपदा पीड़ितों के लिए भेजा जाएगा। यही वजह रही कि डीएम बीवी आर सिंह पुरूषोत्तम ने टिकट खरीदा ताकि वह भी आपदा पीड़ितों की मदद में शामिल हो सकें।
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