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Bird Flu: कोटद्वार के सिताबपुर में कई कौवे मिले मृत, वन विभाग की टीम ने लिए सैंपल

Sat, 09 Jan 2021 12:25 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार
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मृत मिले कौवे - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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उत्तराखंड के कोटद्वार नगर निगम के वार्ड नंबर-16 सिताबपुर क्षेत्र में पनियाली गदेरे से लगे इलाके में पांच कौवे मरने की सूचना से लोगों के साथ ही प्रशासन में हड़कंप मचा रहा। इस मामले को बर्ड फ्लू से जोड़ते हुए लोगों ने तहसील प्रशासन, वन विभाग, पशुपालन विभाग को सूचना दी। विभागीय अधिकारियों की टीम ने मृत कौवों के सैंपल लिए। सैंपल भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज डिजीटल लैब भोपाल (मध्य प्रदेश) भेजा जा रहा है।

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शुक्रवार को देवी रोड पर पनियाली से लगे सिताबपुर क्षेत्र में कुछ कौवे मृत मिले। सिताबपुर निवासी डा. पदमेश बुड़ाकोटी ने पार्षद गायत्री भट्ट को क्षेत्र में मामले की जानकारी दी। पार्षद ने इसकी सूचना पशुपालन विभाग और प्रशासन को दी। सूचना मिलने पर एसडीएम योगेश मेहरा, तहसीलदार विकास अवस्थी, कोटद्वार रेंज अधिकारी शीतल वैद्य, पशु चिकित्साधिकारी डा. बीएम गुप्ता मौके पर पहुंचे।

वन विभाग की ओर से मृत कौवों के सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल की लैब में भेजा जा रहा है। उधर, रेंजर शीतल वैद्य ने बताया कि तीन मृत कौवों के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे जा रहे हैं, जबकि दो कौवे को दफना दिया गया है। जिस स्थान पर कौवे मृत मिले हैं, वहां से ऊर्जा निगम की हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। प्रथम दृष्टया कौवों की मौत करंट लगने से प्रतीत हो रही है। बर्ड फ्लू को देखते हुए सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। 
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तीन दिनों से आ रही थीं आवाजें
हिमालयन धरोहर अध्ययन केंद्र के निदेशक डा. पदमेश बुड़ाकोटी ने बताया कि देवीरोड पर पुल के पास मछली और चिकन मटन की दुकानें हैं, जिससे पनियाली गदेरे में पुल के पास पक्षी मंडराते रहते हैं। पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में कौवों की काफी आवाजें सुनाई दे रही थी। शुक्रवार को पनियाली गदेरे में तीन और आसपास के लोगों के खेतों में दो कौवे मृत मिले। उन्होंने कहा कि यह संवेदनशील मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए। 

राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र केंद्र की क्षमता बढ़ाने की तैयारी

पौड़ी जिले में पोल्ट्री फार्म को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र कोटद्वार की क्षमता बढ़ाने की तैयारी चल रही है। जिला प्रशासन की ओर से जिला खनिज फाउंडेशन न्यास से 98.9 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। पशुपालन विभाग की ओर से मशीनें और जेनरेटर की खरीद की जा चुकी है। अगले चार माह में मुर्गी बाड़ा भी तैयार कर लिया जाएगा।

नए प्रोजेक्ट से 32 हजार अंडे प्रतिदिन चूजे बनाने के लिए रखे जा सकते हैं। एक सप्ताह बाद इन्हें हैचर मशीन में तीन दिन के लिए रखा जाता है और चूजे विकसित हो जाते हैं। मुर्गी बाड़ा भी चार माह में तैयार हो जाएगा। कुक्कुट प्रक्षेत्र के प्रभारी डा. राजेश कुमार ने बताया कि कुक्कुट प्रक्षेत्र केंद्र की क्षमता बढ़ाने के लिए मशीनें और जेनरेटर की खरीद कर ली गई है। विभाग का प्रयास है कि चार माह में मुर्गी बाड़ा भी विकसित कर लिया जाए।

कड़कनाथ और वनराजा के चूजे किए जा रहे तैयार
राजकीय कुक्कुट प्रक्षेत्र में जिला पौड़ी के साथ ही रुद्रप्रयाग का जिम्मा भी है। यहां पर कड़कनाथ के साथ ही वनराजा के चूजे हैचरी में विकसित किए जा रहे हैं। वनराजा का रंग ब्राउन होता है। वनराजा मुर्गी की अंडा देने की क्षमता अन्य मुर्गियों की अपेक्षा अधिक है। यह 72 हफ्ते में 200 तक अंडे देती है। हालांकि हेल्थ के मामले में कड़कनाथ के अंडे में प्रोटीन और इम्यूनिटी ज्यादा होती है। कोटद्वार की ओर से पिछले वर्ष 1,26,000 हजार चूजे वितरित किए गए थे। विभाग की ओर से क्षेत्र के लोगों को वनराजा प्रजाति के चूजे 22 रुपये प्रति चूजा और कड़कनाथ प्रजाति के चूजे 30 रुपये प्रति चूजा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। 
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तराई पूर्वी वन प्रभाग के जलाशयों में ड्रोन से की जा रही मॉनीटरिंग

देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू के फैलने एवं कई पक्षियों के मरने के बाद वन विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। शुक्रवार को वन टीम ने तराई पूर्वी वन प्रभाग के जलाशयों के आसपास ड्रोन कैमरों से पक्षियों की निगरानी की। 

आईएफएस एवं बाराकोली के प्रभारी रेंजर अभिमन्यु ने बताया कि तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी के बैगुल, धौरा, नानकसागर एवं शारदा सागर जलाशय में सर्दी के मौसम में सैकड़ों की संख्या में विदेशी पक्षी प्रवास के लिए आते हैं। इस कारण बर्ड फ्लू के संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इसके मद्देनजर तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ के निर्देश पर ड्रोन के जरिये जलाशयों के आसपास प्रवासी पक्षियों की निगरानी की जा रही है।

यदि किसी पक्षी की असमय मौत होती है तो टीम उसकी तत्काल जांच करेगी। बताया कि सप्ताह में दो दिन ड्रोन से क्षेत्र की एरियल विडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर सघन विश्लेषण किया जाएगा। इससे बर्ड फ्लू का मामला संज्ञान में आने पर रोकथाम के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि प्रभाग की रेंजों में वन कर्मी भी पक्षी बहुल क्षेत्रों में नियमित गश्त कर रहे हैं। आईएफएस ने लोगों से कहीं भी मृत पक्षी मिलने पर तुरंत वन या पशुपालन विभाग को सूचना देने की अपील की है। कहा कि मृत मिले पक्षियों से दूरी भी बनाए रखें। 
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