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Bird Flu: नौ प्रवासी पक्षियों समेत 78 पक्षी मिले मृत, बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए सरकार ने गठित की समितियां

Tue, 12 Jan 2021 09:53 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • राज्य स्तर पर एसीएस और जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में बनाई समिति
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए सरकार ने राज्य और जिला स्तर पर समितियां गठित कर दी हैं। राज्य स्तर पर अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त और जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति बनाई गई हैं। इस संबंध में सचिव पशुपालन आर. मीनाक्षी सुंदरम ने आदेश जारी किए हैं। 

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राज्य स्तरीय समिति में अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव, सदस्य प्रमुख सचिव या सचिव स्वास्थ्य, प्रमुख सचिव वन, सचिव पशुपालन, कुलपति पंतनगर विश्वविद्यालय, स्वास्थ्य महानिदेशक, मुख्य वन जीव प्रतिपालक, निदेशक पशुपालन होंगे। जिला स्तरीय समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष, सदस्य मुख्य चिकित्साधिकारी, जिले के सभी प्रभागीय वनाधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी होंगे। राज्य और जिला स्तरीय कमेटी बर्ड फ्लू को लेकर केंद्र की ओर से जारी दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की कार्रवाई करेंगे।

वहीं,  मंगलवार को 78 पक्षी मृत पाए। इसमें से नौ प्रवासी पक्षी भी हैं। प्रदेश में प्रवासी पक्षियों के मृत मिलने से वन विभाग की चिंता बढ़ी है। नोडल अधिकारी कपिल लाल ने बताया कि नौ प्रवासी पक्षियों के मृत पाए जाने का मामला केंद्रीय तराई वन प्रभाग का है। इनके सैंपल ले लिए गए हैं। इन पक्षियों सहित गढ़वाल और कुमाऊ मंडल में कुल 78 पक्षी मृत पाए गए।
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उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर नोडल अधिकारी बना दिए गए हैं। इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए गए हैं। सभी आद्र भूमि, जलाशयों आदि की निगरानी की जा रही है। वन मंत्री हरक सिंह के मुताबिक वन विभाग के स्तर से लोगों से अपील की गई है कि वे अपने स्तर पर मृत पक्षियों को हटाने की कोशिश न करें और इसकी सूचना वन विभाग को दें।

ड्रोन फोर्स का भी हो रहा है इस्तेमाल
प्रवासी पक्षियों के मूवमेंट को ट्रैक करने के लिए वन विभाग के स्तर से ड्रोन फोर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि बैगुुल, शारदा सागर आदि जलाशयों में इसका उपयोग किया जा रहा है। 

रुड़की में पोल्ट्री फार्मों से 25 सैंपल जांच के लिए भेजे 
प्रदेश में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि के बाद मंगलवार को पशु चिकित्सा विभाग की टीमों ने रुड़की समेत विभिन्न क्षेत्रों से पोल्ट्री फार्म और बैक यार्ड में मुर्गों के 25 सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए बरेली लैब में भेजा गया हे। वहीं दूसरी ओर एक कौए का बिसरा भी जांच के लिए भेजा है। 

बर्ड फ्लू के मद्देनजर प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत मंगलवार को पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश भट्ट ने टीम के साथ विभिन्न क्षेत्रों से मुर्गों से 25 सैंपल लिए हैं। उन्होंने बताया कि पिरान कलियर में बैक यार्ड से पांच मुर्गे मुर्गियों के सैंपल लिए गए हैं। जबकि इमलीखेड़ा में पोल्ट्री फार्म से आठ सैंपल, नन्हेड़ा में बैक यार्ड से चार सैंपल, बंदाखेड़ी में बैक यार्ड से चार सैंपल और नगर निगम रुड़की क्षेत्र में पनियाला रोड से बैक यार्ड से चार सैंपल लिए गए हैं।

डॉ. भट्ट ने बताया कि सभी सैंपल जांच के लिए बरेली स्थित लैब में भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि जो सैंपल लिए गए हैं, उनमें बर्ड फ्लू के लक्षण हो सकते हैं। फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मुर्गी पालकों को मेडिसीन भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसी के साथ पिछले दिनों सोलानी नदी के समीप मिले कौए का बिसरा भी जांच के लिए भेजा गया है। इस दौरान टीम में एसके सिंह, बिरेश बल आदि मौजूद रहे। 

मुर्गों की आपूर्ति घटकर आधी से भी कम हुई 

जब से बर्ड फ्लू फैलने की बात सामने आई है तब से मुर्गों की बिक्री में भी खासी गिरावट आ गई है। मीट की जिन दुकानों पर पहले पचास से लेकर सौ मुर्गों तक की आपूर्ति हो रही थी, वहां अब यह संख्या घटकर आधी से भी कम रह गई है। ग्राहकों में मांग कम हो जाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। लोगों में भी दहशत का माहौल बना हुआ है। 

किट पहनकर सैंपलिंग करने के दिए निर्देश 
बर्ड फ्लू के मद्देनजर लिए जा रहे सैंपलों को चिकित्सक किट पहनने के बाद ही कलेक्ट करेंगे। इस बाबत शासन की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश भारद्वाज ने बताया कि रुड़की अस्पताल में बीस पीपीई किट भिजवाई गई है। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी किट भेज दी गई हैं। चिकित्सकों को पीपीई किट पहनकर सैंपल लेने समेत सभी जरूरी सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

हरिद्वार में  दो कौवे मृत हालत में मिले
बर्ड फ्लू अलर्ट के बीच जनपद में दो कौवे मृत हालत में मिले हैं। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों कौवों के सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल भेज दिए हैं। कौवे के मृत हालत में मिलने से वन विभाग ने सतर्कता और बढ़ा दी है। 

राज्य सकार की ओर से बर्ड फ्लू के अलर्ट किया हुआ है। इसको लेकर वन विभाग भी काफी सतर्कता बरत रहा है। वन विभाग की ओर से जलाशयों और पक्षियों पर नजर रखी जा रही है। इसी बीच मंगलवार को वन विभाग को अलग-अलग स्थानों से दो कौवों के मरने की सूचना मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम कनखल निवासी प्रणव के घर पहुंची। यहां उन्हें एक कौवा मृत अवस्था में पड़ा मिला। उसे वन विभाग की टीम ने अपने कब्जे में ले लिया।

इसके अलावा रोशनाबाद स्पोर्ट्स स्टेडियम के पास एक और कौवे के मरे पड़े होने की सूचना पर वन टीम ने उसे भी अपने कब्जे में ले लिया। प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा का कहना है कि मृतक पाए गए दोनों कौवे के बीच लगभग 15 किलोमीटर का अंतर है।

वैसे भी बर्ड फ्लू से एक साथ बड़ी मात्रा में पक्षी मरते हैं, जिससे प्रथम दृष्टया उनके बर्ड फ्लू से मरने की आशंका नजर नहीं आ रही है, लेकिन फिर भी जांच के लिए सैंपल भोपाल प्रयोगशाला में भेज दिए गए हैं। उधर, राजाजी टाइगर रिजर्व से भी हर दिन बर्ड फ्लू को लेकर रिपोर्ट मांगी जा रही है।

पौड़ी जिले में 11 पक्षियों की मौत, सैंपल जांच को भेजे
मंगलवार को पौड़ी जिले में कुल 11 पक्षियों की मौत हो गई। श्रीनगर और कीर्तिनगर में 3, लैंसडौन में तीन और कोटद्वार में 5 कबूतर और कौवे मृत मिले। प्रशासन ने सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। दो दिन में श्रीनगर क्षेत्र मेें 7 और लैंसडौन में पांच पक्षी मृत मिल चुके हैं।

श्रीनगर में भक्तियाना स्थित एसएसबी सीटीसी परिसर में 2 कौवे मृत मिलने की सूचना पर एसडीएम रविंद्र बिष्ट, पशु चिकित्साधिकारी डा. रजनीश पांडे और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। पशुपालन विभाग के कर्मियों ने पीपीई किट पहनकर दोनों मृत कौवों का सैंपल लिया और वन विभाग के सुपुर्द कर दिया। वहीं, तहसीलदार कीर्तिनगर मंजू राजपूत को मलेथा के समीप बदरीनाथ हाईवे पर वाहन से कुचला कौवा मिलने की सूचना मिली। एसडीएम कीर्तिनगर आकांक्षा वर्मा ने बताया कि हो सकता है कि मरने के बाद कौवा वाहन से कुचल गया हो। इसलिए उसकी सैंपलिंग करा दी गई है। यदि मृत पक्षी में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई तो उक्त क्षेत्र कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाएगा। 

वहीं कोटद्वार में बालासौड़, तहसील और सिगड्डी सिडकुल के पास 5 कबूतर और कौवे मृत मिले। कोटद्वार रेंज अधिकारी शीतल वैद्य ने बताया कि पक्षियों के मरने की जगह-जगह से सूचना मिल रही है। उनका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। 

लैंसडौन में 2 कबूतर व एक कौवा मृत मिला। दो दिनों में क्षेत्र में मृत कबूतर और कौवों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। रेंज अधिकारी लैंसडौन पूनम कैंथोला ने बताया कि जयहरीखाल की पशु चिकित्साधिकारी मंजूपाल ने सैंपलों को भोपाल लैब भेज दिया है।
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खेत में तड़पता मिला पक्षी, मौत

चमोली जिले के निजमूला घाटी के गौणा गांव में एक पक्षी की मौत हो गई। गौणा गांव के वन सरपंच चतुर सिंह ने बताया कि खेत में एक पक्षी तड़पता दिखा और कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। बर्ड फ्लू की आशंका के चलते कोई उसके पास नहीं गया। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ आशुतोष सिंह ने बताया कि वन क्षेत्राधिकारी को टीम के साथ मौके पर भेजा गया। टीम ने सैंपल जांच के लिए भेज दिया है।

बर्ड फ्लू को लेकर रैपिड रिस्पांस टीम गठित 
बर्ड फ्लू को लेकर जिले में पशुपालन विभाग की ओर से तीनों ब्लाकों में रैपिड रिस्पांस टीम गठित कर दी गई है। साथ ही मुर्गों की जांच शुरू कर दी गई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. रमेश सिंह नित्वाल ने बताया कि आरआरटी के माध्यम से जिले में 25865 मुर्गों की जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक जिले में बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं आया है। इधर, जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि विभाग को सघनता से जांच के निर्देश दिए गए हैं। इधर, वन विभाग की ओर से भी रेंजवार पक्षियों का अध्ययन कर जांच की जा रही है। 

पक्षियों की मौत की झूठी खबर ने वन विभाग को लगवाई दौड़
बर्ड फ्लू से बचने के लिए जहां एक ओर शासन प्रशासन सतर्क है, वहीं पक्षियों की मौत की झूठी खबर ने वन विभाग के कर्मचारियों की दौड़ बढ़ा दी है। फर्जी कॉल आने से वन विभाग के कर्मचारियों को दिन भर शहर भर में घूमना पड़ रहा है। आलम यह है कि अकेले मालसी रेंज कार्यालय में एक दिन में 20 से अधिक फर्जी कॉल आने से दिनभर कर्मचारियों को दौड़ना पड़ा।

मालसी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी एमएम बैंजवाण ने बताया कि मंगलवार को करीब 20 फर्जी कॉल कर लोगों ने पक्षियों की मौत की खबर दी, लेकिन मौके पर पहुंची टीम को एक भी मृत पक्षी नहीं मिला। जबकि, कुछ लोगों ने तो यह तक कह दिया कि हम यह जांचने के लिए कॉल कर रहे थे कि सूचना देने पर वन विभाग की टीम पहुंचती भी है या नहीं। बैंजवाण ने कहा कि बर्ड फ्लू से बचने के लिए हर एक शिकायत पर टीम को भेजा जा रहा है। उधर, कर्मचारियों की कमी के चलते भी फर्जी कॉल से मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि पक्षियों की मौत की झूठी खबर से अफवाह न फैलाएं।
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