बर्ड फ्लू के मद्देनजर केंद्र सरकार की ओर एसओपी जारी कर दी गई है। डॉ. योगेश भारद्वाज ने बताया कि जिले के सभी पोल्ट्री फार्मों पर बाहरी व्यक्तियों के आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। फार्म संचालकों को भी गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग रखेगा पक्षियों की गतिविधियों पर नजर
पोल्ट्री फार्म पशु चिकित्सा विभाग के अंतर्गत आते हैं, जो मुर्गों की सैंपलिंग कर सकते हैं, लेकिन कौआ समेत अन्य पक्षियों का दायरा वन विभाग के क्षेत्र में है। पशु चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, जंगलों में कौआ या किसी अन्य पक्षियों में लक्षण दिखाई देने पर वन विभाग के अधिकारियों को ही सूचित करना होगा। ऐसे में बर्ड फ्लू के अभियान के मद्देनजर जिला प्रशासन और वन विभाग से भी समन्वय स्थापित किया जाएगा।
यह है लक्षण
पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि बर्ड फ्लू में पक्षियों में सांस की नली में समस्या आती है। आतों में इंफेक्शन होता है। इसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है। फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। मांस को उबालकर और अच्छे से पकाकर ही खाना चाहिए।
यह बरते सावधानी
बर्ड फ्लू के मद्देनजर अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत पोल्ट्री फार्म संचालकों को चूने का छिड़काव करने और पोटैशियम परमेगनेट के प्रयोग की सलाह दी गई है। साथ ही काम करते समय हर वक्त दस्ताने का प्रयोग करने को कहा गया है।