दीवार के क्षतिग्रस्त होने से वहां खड़ी एक आल्टो कार मलबे के साथ नीचे गिरने से क्षतिग्रस्त हो गई। क्षतिग्रस्त दीवार का मलबा स्कूल परिसर में फैल गया। नगर के कई स्थानों में पत्थर टूट कर सड़कों पर आ गए। बुधवार को नैनी झील का जलस्तर महीने के सर्वाधिक स्तर 10 फुट से ऊपर पहुंच गया। अब झील लबालब भर गई है। जलस्तर एक फुट और बढ़ा तो डांठ खोलने की नौबत आ सकती है। बागेश्वर में मंगलवार आधी रात सरयू उफान में आ गई। इसका जलस्तर खतरे के निशान से महज डेढ़ मीटर नीचे रह गया। बागेश्वर से कपकोट तक अलर्ट कर दिया गया। कपकोट के संवेदनशील स्थलों के बाशिंदों को आश्रय स्थलों में शिफ्ट कर दिया गया। बाजपुर में लेवड़ा नदी में बाढ़ आने पर हल्द्वानी स्टेट हाइवे पर जलभराव हो गया।
बागेश्वर जिले में 12 सड़कें बंद रहीं। इससे 35 हजार की आबादी यातायात सेवा से वंचित रही। चंपावत जिले में चार जबकि अल्मोड़ा जिले में तीन सड़कें अब भी बंद हैं। थल-मुनस्यारी मार्ग पर रातीगाड़ में 40 मीटर सड़क का पता नहीं है। मार्ग को बंद हुए 10 दिन से अधिक समय हो गया है। 150 मीटर सड़क पूरी तरह से मलबे से पटी है। वहीं, कक्कड़ सिंह बैंड पर नीचे की ओर से भूस्खलन होने से सड़क ध्वस्त हो गई है।
अलबत्ता हरड़िया वैली ब्रिज की लंबाई बढ़ाने के बाद वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। कैलाश मानसरोवर यात्रियों के साथ भी मौसम की आंखमिचौली का सिलसिला जारी रहा। सुबह मौसम खुला तो 15वें दल के 10 यात्री हेलीकाप्टर से गुंजी पहुंच पाए, लेकिन 18 यात्री पिथौरागढ़ में ही रह गए। गुंजी से दसवें दल के 12 यात्री पिथौरागढ़ आए, जबकि सात यात्री अभी गुंजी में हैं।