प्रदेश में नए विश्वविद्यालय खोलने की होड़ में न तो मानकों की जांच की गई और न ही सरकार के फैसलों को अधिनियमों का हिस्सा बनाया गया। 11 में से 10 विश्वविद्यालय ऐसे खोले गए हैं, जिनमें नियमों की पूरी प्रक्रिया अमल में नहीं लाई गई है। भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, निजी विवि की स्थापना के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति प्रस्ताव का अनुमोदन करती है। इसके बाद राज्य सरकार प्रायोजित संस्था एक आशय पत्र जारी करती है। इस पत्र में निजी विवि की स्थापना के लिए सभी शर्तें शामिल होती हैं।
इसकी आख्या आने के बाद उच्च स्तरीय समिति इसकी जांच करती है और इसके बाद राज्य सरकार को आख्या भेजती है। लेकिन पड़ताल में सामने आया है कि केवल एक निजी विवि के मामले में दिशा निर्देशों का पूर्ण अनुपालन किया गया है।