उत्तराखंड में राज्य कर्मचारी कल्याण निगम का गठन आखिरकार कर दिया गया है। निगम का काम कर्मचारियों को सीएसडी कैंटीन की तर्ज पर सस्ता सामान उपलब्ध कराना होगा।
शासन ने निगम के बोर्ड की कमान अपर मुख्य सचिव (वन एवं ग्राम्य विकास आयुक्त) को सौंपी है। इसमें कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा सरकार की ओर से दो नामित सदस्य भी शामिल होंगे।
राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के गठन का फैसला करीब पांच माह पूर्व हुई कैबिनेट में हुआ था। राज्य गठन से पूर्व यह व्यवस्था थी और उत्तर प्रदेश में कल्याण निगम विभिन्न स्थानों पर कैं टीन संचालित कर रहा है। राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में निगम से संबंधित विभाग खाद्य है और राज्य में इसे सहकारिता विभाग को सौंप दिया गया। कर्मचारियों ने शासनादेश जारी न होने का मुद्दा मंत्रिमंडल की उप समिति के सामने उठाया तो शासन हरकत में आया।
जारी आदेश में बोर्डऑफ गवर्नर में वित्त, खाद्य, सहकारिता और उद्योग सचिव को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। इसके अलावा निबंधक सहकारिता को अधिशासी निदेशक नियुक्त किया गया है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के दो, उत्तराखंड सचिवालय संघ का एक, उत्तराखंड एससीएसटी इंप्लाइज फेडरेशन का एक प्रतिनिधि भी शामिल किया गया है। दो सदस्यों को नामित करने का अधिकार सरकार को होगा।
ढांचा तय होना बाकी
शासन ने राज्य कर्मचारी कल्याण निगम का गठन तो कर दिया है, लेकिन अभी इसका ढांचा तय होना बाकी है। इसके अलावा दुकानों, वैट में छूट आदि की व्यवस्था भी की जानी है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह, प्रवक्ता अरुण पांडे आदि के मुताबिक इसके लिए भी सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।
अच्छे काम की भी मिलेगी जानकारी
उत्तराखंड सरकार ने अफसरों व कार्मिकों की वार्षिक चरित्र पंजिका में प्रविष्टी के लिए नई नियमावली लागू कर दी है। कार्मिक विभाग की तरफ से जारी इस नियमावली में काफी बदलाव किया गया है।
अभी तक कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रविष्टी की सूचना ही दी जाती थी, लेकिन अब अच्छी एसीआर लिखे जाने की प्रति भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले से राजकीय सेवाओं में पीसीएस आदि से समूह ग तक लगभग तीन लाख कर्मचारी प्रभावित होंगे। इस व्यवस्था से कर्मचारियों के आगे बढ़ने के ज्यादा अवसर उपलब्ध होंगे।
यह परिवर्तन अखिल भारतीय सेवा के अफसरों पर लागू नहीं होगा। अभी तक यह व्यवस्था थी कि यदि किसी कार्मिक की चरित्र पंजिका में उसके वरिष्ठ अफसर ने प्रतिकूल प्रविष्टी दर्ज की है तो उसकी जानकारी संबंधित कार्मिक को दी जाती थी। फिर संबंधित कर्मचारी प्रतिवेदन देकर अपना पक्ष रखता था।
लेकिन अब चरित्र पंजिका में अच्छी बुरी दोनों तरह की प्रविष्टी की जानकारी दी जाएगी। मान लिया जाए कि किसी अफसर ने बहुत बढ़िया काम किया और उसे केवल अच्छा/संतोषजनक की श्रेणी में प्रविष्टी दी गई तो वह उत्तम या उससे ऊपर की श्रेणी के लिए प्रतिवेदन देकर अपनी बात रख सकेगा। अपर सचिव आरसी लोहानी ने कहा कि यह पहली बार हुआ है और इससे सभी को अपनी अच्छी बुरी प्रविष्टी की जानकारी मिल सकेगी।
चरित्र पंजिका में प्रविष्टी की श्रेणी
उत्कृष्ट
अति उत्तम
उत्तम
अच्छा/संतोषजनक
प्रतिकूल
इन तिथियों के बाद नहीं दी जाएगी प्रविष्टी
30 जून तक प्रतिवेदक अधिकारी
31 अगस्त तक समीक्षक अधिकारी
30 सितंबर तक स्वीकारकर्ता अधिकारी