प्रचंड बहुमत की सरकार के सामने उत्तराखंड के 250 से अधिक आबादी वाले 750 गांवों को सड़कों से जोड़ने की प्रचंड चुनौती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इन सड़कों के लिए बजट भी है और प्लानिंग भी, मगर उपलब्ध क्षमता के हिसाब से समय बहुत कम है।
सरकार को दो साल में 17 साल के बराबर काम करना है। इस चुनौती को पूरा करने के लिए उसके पास क्षमता का भारी अभाव है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए उसे प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट की संख्या को 35 से बढ़ाकर 110 करना होगा।
इसके लिए अब वह केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) और भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों की मदद लेने जा रही है। सीपीडब्ल्यूडी से सहमति मिल चुकी है। इसके साथ ही पहले से काम कर रहे मंडलों (प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट) में खाली पड़े करीब 243 तकनीकी पदों को आउटसोर्स से भरने की भी तैयारी है।
इसलिए बढ़ी प्रदेश सरकार की दिक्कत
PM MODI
केंद्र सरकार ने पीएमजीएसवाई की समयसीमा को 2022 से घटाकर 2019 कर दिया। इससे प्रदेश सरकार के सामने 250 से अधिक आबादी के सभी गांवों को सड़कों से जोड़ने की कठिन चुनौती खड़ी हो गई। 31 जनवरी 2018 तक ऐसी 750 गांवों हैं, जिन्हें सड़कों से जोड़ा जाना है।
17 साल में जुड़े 1000 गांव
प्रदेश सरकार को लक्ष्य पूरा करने के लिए दो साल में 17 साल के बराबर काम करना होगा। 17 सालों में सरकार ने 250 से अधिक आबादी के 1000 गांवों को सड़कों से जोड़ा।
6000 किमी सड़क पर 3247 करोड़ होंगे खर्च
दो साल में प्रदेश सरकार के सामने 6000 किमी सड़कों पर काम शुरू करने की चुनौती है। इन पर 3247 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें से 1523 करोड़ रुपये के कार्य पूर्व में स्वीकृत हैं, जबकि 1724 करोड़ के कार्यों की इस माह अनुमोदन मिल जाएगा।
एक पीआईयू की क्षमता 15 करोड़ की
प्रतीकात्मक तस्वीर
योजना के लिए 35 प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट(पीआईयू) कार्यरत हैं। एक पीआईयू की खर्च क्षमता 15 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की है। लक्ष्य पूरा करने को खर्च क्षमता 30 करोड़ करना होगा और पीआईयू की संख्या को 110 तक बढ़ाना होगा।
सड़कों का लक्ष्य पूरा करने के लिए हम कार्यक्षमता बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से एक पीआईयू मिल रही है। केंद्र सरकार से सार्वजनिक उपक्रमों से भी संपर्क किया गया है। लोक निर्माण विभाग, लघु सिंचाई से भी पीआईयू मांगे गए हैं। जो पीआईयू कार्य कर रहे हैं, उनमें खाली तकनीकी पदों को आउटसोर्स से भरा जाएगा। पूरी कोशिश है कि सभी सड़कों पर कार्य आरंभ हो जाए।
- मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास