देहरादून पुलिस की अभिरक्षा से बागपत में फरार हुए एक लाख रुपये के इनामी अमित उर्फ भूरा की तलाश में हुई ताबड़तोड़ दबिश बेनतीजा रही। पुलिस ने भूरा के करीबियों पर शिकंजा कसा है।
डीजीपी ने ली घटना की नैतिक जिम्मेदारी
रुड़की जेल के बाहर तीन लोगों की हत्या के आरोपी भूरा की फरारी से दून पुलिस की बड़ी फजीहत हुई है। एसएसपी अजय रौतेला को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी तो डीजीपी को घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेनी पड़ी। अब पुलिस के सामने भूरा को दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचने की है।
यूपी पुलिस की मदद के लिए गढ़वाल रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक संजय गुंज्याल स्पेशल टास्क फोर्स, स्पेशल आपरेशन ग्रुप और हरिद्वार की टीम लेकर सोमवार से ही बागपत में डेरा डाले हुए हैं। आशंका यह भी है कि बागपत जिले में भूरा को सुरक्षित ठिकाना मिल सकता है।
इस लिहाज बागपत के अलावा बड़ौत, बामनौली और टटीरी के आसपास भी पुलिस ने जाल बिछाया है। वहीं, पुलिस टीमें दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी भूरा को तलाश रही हैं। हालांकि, पुलिस को अभी तक कोई खास सुराग नहीं मिला है।
फिलहाल परिजनों और करीबियों पर शिकंजा कस पुलिस भूरा पर दबाव बनाने में जुटी है। उधर, पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने भूरा की तलाश में पिछले 24 घंटे में हुई पुलिस कार्रवाई की समीक्षा की।
भूरा को था हमले का खतरा
भूरा के दुश्मनों की लिस्ट वैसे ही लंबी है, लेकिन रुड़की जेल के बाहर सुनील राठी के विरोधी चीनू पंडित पर जानलेवा हमला कर उसने बड़ी दुश्मनी मोल ले ली थी। भूरा को अभिरक्षा में हमले का डर सता रहा था।
राठी, भूरा के पास था मोबाइल
रुड़की जेल कांड के बाद भी जेल प्रशासन सबक लेने को तैयार नहीं है। पौड़ी जेल में बंद सुनील राठी और देहरादून कारागार में रहे अमित उर्फ भूरा के पास मोबाइल था। सर्विलांस में इस बात का खुलासा होने पर पुलिस ने आपत्ति भी जताई थी, लेकिन विभाग में समन्वय की कमी से समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। इसका नतीजा है कि भूरा का प्लान कामयाब रहा।
रुड़की उप कारागार के बाहर तीन लोगों की हत्या के बाद तब इस जेल में बंद रहे सुनील राठी के पास मोबाइल फोन होने का खुलासा हुआ था। उस समय जेल प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन भूरा के फरार होने के बाद इनकी पोल खुल गई है। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक देहरादून जेल में बंद भूरा के पास भी मोबाइल था।
वह लगातार पौड़ी जेल शिफ्ट किए गए सुनील राठी से बात कर रहा था। उसके फरार होने की योजना भी मोबाइल के जरिये तैयार हुई थी। दोनों के पास मोबाइल होने का खुलासा कुछ दिन पहले ही हुआ था। शासन को भेजे गए इनपुट भी भेजा गया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
भूरा की फरारी के साथ जेल में रहते हुए गैंग चलाने के मामले को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ताकि जेलों में अपराधियों को मिलने वाली सुविधाओं पर शिकंजा कसा जा सके।
- बीएस सिद्धू, पुलिस महानिदेशक
पौड़ी और देहरादून जेल में अपराधियों द्वारा फोन चलाए जाने का कोई इनपुट किसी भी स्तर से प्राप्त नहीं हुआ है। यदि मिलता तो कार्रवाई जरूर की जाती है।
- विनोद शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक जेल
बडे़ खून-खराबे की तैयारी तो नहीं
शातिर बदमाश अमित उर्फ भूरा की फरारी के बाद आने वाले दिनों में बड़ा खूनखराबा हो सकता है। फरारी के दौरान पुलिस कर्मियों के हथियारों की लूट से इसी तरह का संकेत मिलता है। माना जा रहा है कि पुलिस के आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल बदमाश एक-दूसरे के दुश्मनों को ठिकाने लगाने में कर सकते हैं।
ऐसे में उन लोगों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्हें भूरा से खतरा है। अमति उर्फ भूरा के तार पश्चिमी यूपी के अपराध जगत से गहरे जुड़े हैं। खुद का गिरोह चलाने वाला भूरा दूसरे गिरोह के सरगनाओं के दुश्मनों को ठिकाने लगता रहा है। रुड़की जेल में रहते हुए सुनील राठी ने अपने विरोधी चीनू पंडित को रास्ते से हटाने के लिए भूरा का इस्तेमाल किया था।
हालांकि इस हमले में चीनू बच गया था, लेकिन अब भूरा की फरारी के बाद चीनू पर हमले का खतरा बढ़ गया है। माना जा रहा है कि भूरा की फरारी सोची-समझी साजिश का नतीजा है। इसकी साजिश दून जेल में ही रची गई है। यह भी चर्चा है कि पश्चिमी यूपी के कई अपराधी गिरोह एक साथ आ गए हैं।
पुलिस को इनपुट मिले हैं कि राहुल खट्टर और सतेंद्र बरवाला के तार सुनील राठी गैंग से जुड़ गए हैं। इस जानकारी से दोनों प्रदेशों की पुलिस में खलबली है। फरारी के खेल में एक बड़े अपराधी का नाम भी पुलिस की जुबान पर है, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में खुले तौर पर कुछ कहने से बच रही है। डीआईजी संजय गुंज्याल मानते हैं कि भूरा की फरारी सुनियोजित है।