मानदेय बढ़ाने व स्कूलों में भोजन माताओं के उत्पीड़न सहित कई मांगों को लेकर प्रगतिशील भोजनमाता संगठन ने बृहस्पतिवार को परेड ग्राउंड से रैली निकालकर सचिवालय कूच किया। सचिवालय के पास पहले से ही मौजूद पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। जिसके बाद भोजनमाताएं वहीं धरने पर बैठ गईं और सभा की। करीब एक घंटे धरना-प्रदर्शन के बाद मुख्य सचिव की ओर से भोजनमाताओं को वार्ता के लिए बुलाया गया। जिसके बाद भोजनमाताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से वार्ता कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले प्रदेशभर से भोजनमाताएं परेड ग्राउंड में एकत्रित हुईं। वहां से मांगों के समर्थन व सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एस्लेहॉल चौक होते हुए सचिवालय कूच किया। सचिवालय के कुछ आगे पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया। जिससे भोजनमाता आक्रोशित हो गई और वहीं धरने पर बैठकर सभा करने लगीं। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भोजनमाताएं स्कूलों में खाना बनाने से लेकर सफाई आदि का पूरा काम करती हैं, लेकिन इसके बाद भी उन्हें मानदेय के रूप में मात्र 2000 हजार रुपये मिलते हैं।
स्कूलों में उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। किसी काम के लिए मना करने पर उन्हें स्कूल से निकालने की धमकी दी जाती है। अधिकतर भोजनमाताएं गरीब व विधवा हैं और उन्हें अपने बच्चों का पालन-पोषण खुद करना पड़ता है। मात्र दो हजार रुपये में परिवार का पालन-पोषण व बच्चों की पढ़ाई नहीं कर पा रही हैं। कहा कि एक ओर जहां प्रधानमंत्री पूरे देश की महिलाओं को धुआं से मुक्त करने की बात कह रहे हैं, वहीं भोजनमाताएं आज भी जंगल से लकड़ी लाती हैं और उन्हें जलाकर खाने बनाने को मजबूर हैं। कई भोजनमाताएं 14-15 साल से अधिक समय से काम कर रही हैं, लेकिन छात्र संख्या कम होने के कारण अब उन्हें निकाला जा रहा है।
धरने प्रदर्शन के बाद अध्यक्ष हंसी देवी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव से मिलने के लिए गया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यसचिव के सामने अपना मांगपत्र रखते हुए इन पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। इस मौके पर रजनी देवी, शीला शर्मा, तुलसी, दीपा, मुन्नी देवी, सरिता देवी, लक्ष्मी देवी, गीता देवी सहित प्रदेशभर से भोजनमाताएं शामिल थीं।
ये हैं संगठन की मांगें
- भोजनमाताओं को न्यूनतम वेतन 15 हजार दिया जाए।
- सभी भोजनमाताओं को स्थायी नियुक्ति दी जाए।
- स्कूलों में 25 से अधिक विद्यार्थी होने पर दूसरी भोजनमाता रखी जाए।
- ईएसआई, पीएफ, पेंशन, प्रसूति अवकाश जैसी सुविधाएं दी जाएं।
- भोजनमाताओं का स्कूलों में होने वाला उत्पीड़न बंद किया जाए।
- खाने बनाने के दौरान भोजनमाताओं को धुआं से मुक्ति दिलाई जाए।
- खाना बनाने का काम गैर सरकारी संगठन को सौंपना बंद किया जाए।
- वेतन और बोनस समय पर दिया जाए।
- भोजनमाता को किसी भी हालत में न हटाया जाए।
तहसील में गरजीं भोजनमाता कामगार यूनियन
सीटू से संबद्ध उत्तराखंड भोजनमाता कामगार यूनियन ने बुधवार को कोटद्वार तहसील में प्रदर्शन कर देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए अपनी दस सूत्री मांगों के निराकरण की मांग की। कहा कि भोजनमाताएं न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा समेत कई मांगों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकृष्ट करा चुकी हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है।
बुधवार को उत्तराखंड भोजनमाता कामगार यूनियन की दुगड्डा ब्लाक अध्यक्ष अनीता शर्मा और जिला पंचायत सदस्य भरत सिंह नेगी की अगुवाई में भोजनमाताओं ने कोटद्वार तहसील में धरना-प्रदर्शन किया।
इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने न्यूनतम वेतन 18 हजार करने, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने, दिन का भोजन योजना का निजीकरण न करने, उन्हें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित करने, निर्धारित कार्य के अलावा अन्य कार्य न लिए जाने, भोजन माताओं को कामगार श्रमिक घोषित करने, सेवानिवृत्ति होने के बाद पेंशन देने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद यूनियन की ओर से तहसील प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। प्रदर्शन में कमला देवी, पुष्पा देवी, उर्मिला देवी, मंजू देवी, सरोज देवी, सुधा देवी, राखी रावत, लीला देवी, निर्मला देवी, सुलोचना देवी, गीता देवी और अनीता देवी आदि शामिल रहे।