भीम आर्मी आरएसएस की तर्ज पर संगठन खड़ा करना चाहती है। सम्मेलन में भी वक्ताओं ने कुछ इस तरह के संकेत दिए हैं। विगत दो अप्रैल को रुड़की में भारत बंद के आह्वान पर हुई हिंसा में तकरीबन 20 बरस के युवाओं की भारी फौज जुटी थी। स्थापना दिवस पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भीम आर्मी के नेता प्रेम सिंह ने अपने संबोधन में पहले शिक्षा की जरूरत पर बल दिया।
साथ ही शिक्षा को मिशन बनाने की बात कही। इस दौरान भीम आर्मी की अगुवाई कर रहे नेताओं से देश में इस संगठन को आरएसएस की तर्ज पर काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिस तरह से देश भर में आरएसएस समाज के लोगों को ट्रेनिंग देता है। उसी तरह भीम आर्मी को भी जगह-जगह स्कूल खोलने होंगे और उनमें युवाओं केे ट्रेनिंग देनी होगी।
कांशीराम, बाबा साहेब और महात्मा बुद्ध को किया याद
भीम आर्मी के सम्मेलन में वक्ताओं ने गैर राजनीतिक संगठन के रूप में खुद को खड़ा करने का संकेत देते हुए बसपा पार्टी और सुप्रीमो मायावती का कोई जिक्र नहीं किया। इससे माना जा रहा है कि भीम आर्मी बसपा की लीक से हटकर बड़ा संगठन खड़ा करने की चाह रखती है। प्रदेश अध्यक्ष महक सिंह ने महात्मा बुद्ध के धर्म को अच्छा बताते हुए लोगों से इसे ग्रहण करने की भी अपील की गई।
भीम आर्मी के कार्यक्रम के दौरान देखने वाली बात यह रही कि यहां कार्यकर्ता ही फौज की तरह अनुशासन बनाने को जगह-जगह तैनात थे। दोपहर करीब बारह बजे से शुरू हुए कार्यक्रम से पहले ही मंच समेत सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद कर ली गई थी। उधर, सीओ समेत पूरी फोर्स थाने में ही तैनात रही। पुलिस का कोई व्यक्ति कार्यक्रम स्थल और इसके आसपास नजर नहीं आ रहा था। सीओ परीक्षित कुमार तीन बटालियन फोर्स के साथ शाम तक भगवानपुर थाने में मौजूद रहे।
हर घर में पैदा हो रावण
चंद्रशेखर उर्फ रावण की मां कमलेश देवी ने कहा कि दलित समाज के लोगों को एकजुट होकर काम करना होगा। कहा कि हर घर में रावण पैदा होना चाहिए तभी समाज की सूरत बदलेगी। इस दौरान पदाधिकारियों ने लोगों की मांग पर अगला सम्मेलन बिजनौर में किए जाने को लेकर विचार किया। जल्द ही इसकी घोषणा किए जाने की बात कही गई।
प्रशासन ने नहीं थी अनुमति, अनुमान से कम आई भीड़
भगवानपुर में आयोजित कार्यक्रम की प्रशासन से अनुमति प्राप्त नहीं थी। एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि कार्यकर्ताओं ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन अनुमति जारी नहीं की गई थी। संख्या बल और विचारगोष्ठी के लिहाज से सभी कुछ शांतिपूर्ण रहा है। वहीं दूसरी ओर, कार्यक्रम में अनुमान के मुताबिक कम भीड़ जुटी। कार्यक्रम में लक्सर क्षेत्र के लोग ज्यादा नहीं थे। माना जा रहा है कि अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रमों के चलते भी कम भीड़ रही।