क्या भाजपा सरकारों को कॉकरोच जनता पार्टी के माध्यम से युवाओं की चुनौती मिल रही है? इस सवाल पर मैंदोली ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच प्लेटफार्म पर जिस तरह का घोषणापत्र बनाया गया है उससे साफ है कि कोशिश अराजकता फैलाने की है। जैसे मेनिफेस्टो में लिखा है कि कोई भी विधायक इधर से उधर नहीं जा सकता। बाद में समझ आया कि वह आम आदमी पार्टी की आईटी विभाग देखता था, यानी राघव चड्ढा के लिए ऐसा बोला गया। मैं सवाल विपक्ष से भी पूछना चाहूंगा कि क्या आपके चेहरों में इतना दम नहीं है कि आपको कॉकरोच का सहारा लेना पड़ रहा है।
मैंदोली ने भाजयुमो अध्यक्ष पद तक पहुंचने और राजनीति को क्यों चुना इस सवाल पर कहा कि मैं प्रोफेशनली आर्किटेक्ट हूं। मेरा परिवार, मेरी माता जी भाजपा में लंबे समय से काम करती आई हैं। मेरे खून में भाजपा है। जब मैंने 18 साल का हुआ तो भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता के लिए पांच रुपये की पर्ची कटाई थी। पार्टी में काम करते रहे, अच्छी बात है कि आलाकमान परिश्रमी कार्यकर्ताओं को जरूर देखता है। 2017 में जिला संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष भी रहा। फिर प्रदेश कोषाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री रहा अब प्रदेश अध्यक्ष हूं। पार्टी को युवाओं के बीच पहुंचाने पर काम कर रहा हूं।
बोले- युवा मुख्यमंत्री युवाओं के दिल की बात समझते हैं
पलायन राज्य की बड़ी समस्या है युवा पहाड़ लौटें, इसके लिए क्या हो रहा है? इसके जवाब में वह बोले, नौकरी पहले बड़ी समस्या थी। राज्य बनने से लेकर आज तक करीब 39 हजार युवाओं ने नौकरी हासिल की। जब से पुष्कर सिंह धामी सीएम बने हैं, तब से करीब 30 हजार युवाओं को नौकरी मिली है। जब नौकरी मिल जाती है तो पलायन रुकता है। युवा मुख्यमंत्री युवाओं के दिल की बात समझते हैं। पर्यटन हमारा बड़ा क्षेत्र है। तीन वर्षों में करीब 25 करोड़ विदेशी देवभूमि देखने आए। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर बना। उत्तराखंड ऐसे प्रदेशों में है, जो अच्छी स्थिति में बढ़ रहा है लेकिन पर्यावरण को संतुलित करते हुए।
12 किमी का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बना, ढाई घंटे में लोग दिल्ली से आ रहे हैं। मैं 15 साल की आयु तक गांव में था। हम जब देहरादून आते थे तो सुबह छह बजे निकलते थे। रात को सात-आठ बजे पहुंचते थे। 250 किमी की यात्रा 14 घंटे में। आज आसान हो गया है। राजधानी से प्रदेश की कनेक्टिविटी होनी चाहिए। ऑल वेदर मार्ग देखिए... कभी सोचा नहीं था कि इतनी बड़ी सड़क बन सकती है। आज वहां पर डबल स्पीड से गाड़ियां चलती हैं। रेलवे का काम तेजी से चल रहा है आने वाले वर्षों में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक कोई दिक्कत नहीं होगी। ये सभी सीधे तौर पर पलायन को रोकने और रोजगार की नई दिशाएं तय करने के लिए ही है।