ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर शहर के विभिन्न बैंकों में कर्मचारी भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं। इसके लिए हाथों में काली फीती बांधकर कृषि कानूनों का विरोध किया जा रहा है।
हालांकि, बैंककर्मियों ने कार्य का बहिष्कार नहीं किया है। वहीं, उत्तरांचल बैंक इम्प्लाइज यूनियन के सदस्य भी किसान आंदोलन के समर्थन व कृषि कानूनों के विरोध में हाथों में काली फीती बांधकर कार्य कर रहे हैं।
हरिद्वार के देहात क्षेत्रों में दिखा भारत बंद का असर
भारत बंद के आह्वान पर शहर और देहात क्षेत्रों में किसानों ने सड़कों पर उतरकर चक्का जाम किया। कहीं ज्ञापन सौंपे तो कहीं पुतले जलाकर कृषि कानूनों का विरोध किया। वहीं बाजारों में इसका मिलाजुला असर देखने को मिला। व्यापारियों के समर्थन के चलते नारसन में बंद का पूरा असर रहा। कस्बे के अलावा आसपास के गांवों के बाजार भी बंद रहे।
खानपुर में भी अधिकांश दुकानें बंद रही। वहीं, लालढांग क्षेत्र में करीब 600 खनन कारोबारियों ने किसानों के आंदोलन के समर्थन में काम पूरी तरह से बंद रखा। तो रुड़की तहसील के अधिवक्ता भी कार्य विरत पर रहे। पथरी क्षेत्र के पदार्था में दुकानें बंद रहीं। हरिद्वार और रुड़की शहर में सभी बाजार खुले रहे।
मंगलवार को भारत बंद के तहत किसानों का साथ देने उतरी कांग्रेस और इससे जुड़े संगठनों ने भी जिलेभर में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के पुतले फूंके। मंगलौर में किसानों के साथ आम आदमी पार्टी व भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी पहुंचे और बंद का समर्थन किया। लक्सर, मंगलौर, नारसन, भगवानपुर में किसानों के प्रदर्शन से दोपहर करीब 12 बजे से दो बजे तक हाईवे जाम हो गया।
प्रशासन ने वाहनों का डायवर्ट कर यातायात सुचारु कराया। शाम करीब तीन बजे तक सभी किसान संगठन प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के बाद लौट गए। इसके के बाद सभी जगहों पर यातायात बहाल हो गया। इस दौरान भाकियू (टिकैत), भाकियू (तोमर), उत्तराखंड किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन रोड़ गुट, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन सोसायटी के बैनर तले किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
भारत बंद के चलते मंगलवार को हरिद्वार रोडवेज डिपो से चालीस फीसदी बसों का संचालन नहीं हुआ। बसें नहीं चलने से यात्रियों को कई घंटे तक फजीहत झेलनी पड़ी। शाम को चार बजे बाद कुछ बसों को दिल्ली के लिए भेजा गया।
किसानों ने गन्नों से लदे ट्रक लगाकर हाईवे जाम कर दिया
रुड़की में नारसन और लक्सर पुरकाजी में किसानों ने गन्नों से लदे ट्रक लगाकर हाईवे जाम कर दिया। पुलिस प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास कर रही है। वहीं लक्सर कृषि मंडी में किसान नहीं पहुंचे। खानपुर क्षेत्र के गोवर्धनपुर में बाजार बंद रहा। विधायक ममता राकेश के समर्थन में भगवानपुर में किसान यूनियन के लोगों ने पुतला दहन किया और बाजार बंद कराया। कलियर के बेड़पुर चौक पर विधायक फुरकान अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया।
कुमाऊं में किसान बहुल इलाके ऊधमसिंह नगर जिले में कृषि कानूनों के विरोध भारत बंद का व्यापक असर नजर आया। उधर, पिथौरागढ़ में मिलाजुला असर देखने को मिला। व्यापार संगठन के बंद के समर्थन के बावजूद बाजार में अधिकतर लोगों ने दुकानें खोलीं। अन्य जिलों में बंद का कुछ खास असर देखने को नहीं मिला। कांग्रेस समेत कुछ अन्य राजनीतिक दलों ने बंद के समर्थन में धरना प्रदर्शन किया। ऊधमसिंह नगर में जिन्होंने दुकानें खोली थी व्यापारियों शांतिपूर्ण तरीके से उनकी दुकानें बंद करा दीं।
किसानों के आह्वान पर मंगलवार को भारत बंद के समर्थन का सबसे ज्यादा असर उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में देखने को मिला। यहां भारत बंद के समर्थन में सुबह से ही सभी दुकानें बंद रखी गईं। मुख्य चौराहों पर पुलिस बल तैनात रहा। भारत बंद और किसान आंदोलन को रुद्रपुर के व्यापारियों, मजदूरों, सिख संगठन और पेट्रोलियम एसोसिएशन ने अपना समर्थन दिया है।
साथ ही पेट्रोल पंप सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक बंद रहेंगे। रुद्रपुर रोडवेज डिपो से दिल्ली के लिए बसें संचालित नहीं हुई। रुद्रपुर मुख्य बाजार में खुली कुछ दुकानों को व्यापारियों ने बंद कराया। काशीपुर में भारत बंद को लेकर मुख्य बाजार बंद रहा।
काशीपुर में किसान धरने पर बैठे और यहां सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स मौजूद है। रुद्रपुर में बाटा चौक में किसानों के समर्थन में कांग्रेसियों ने केंद्र सरकार का पुतला फूंका। बाजपुर में भारत बंद के आह्वान पर बाजार बंद कराया। यहां भी पुलिस तैनात है। जसपुर में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना प्रदर्शन कर मार्ग को जाम कर दिया। पुलिस प्रशासन ने यहां ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया।
हल्द्वानी में बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। यहां ट्रांसपोर्ट की दुकानें बंद रहीं। पुरानी सब्जी मंडी खुली रही। पिथौरागढ़ में भारत बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। लोहाघाट, चंपावत में बाजार पूरी तरह खुला।
कृषि कानूनों पर भारत बंद को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि केंद्र सरकार कानून वापस नहीं लेगी। अगर कोई सुधार की गुंजाइश है तो उसके लिए केंद्र ने बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं। देश के किसानों को मजबूत करना है तो पुराने कानूनों की तिलांजलि देनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत से ही होगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कांग्रेस व अन्य दलों ने जो कृषि कानूनों को लेकर भ्रम के बादल पैदा किए हैं, वह जल्द छंट जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का किसान आंदोलन में शामिल नहीं है। कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दल किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक समझौतों का कोई कानूनी महत्व नहीं होता। यह विश्वास की बातें होती हैं। सरकार और किसानों का विश्वास बहुत जरूरी है। किसानों को सरकार की मंशा को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार किसानों की हितैषी है।
पिछले छह सालों में केंद्र सरकार ने किसानों के बजट को 12 हजार करोड़ रुपये से 1.34 लाख करोड़ तक बढ़ा दिया। किसानों की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को डेढ़ गुना तक बढ़ाया। किसानों के मंडी के अलावा बाजार खोल दिए। किसानों के लिए तमाम तरह के विकल्प दिए गए हैं।
कृषि कानून में जो भी सुधार किए गए हैं, उन्हें कांग्रेस ने भी अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था। पंजाब आज आंदोलन का लीडर बना हुआ है, लेकिन वहां कांग्रेस पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में भी ये सारी बातें शामिल हैं। इसलिए इन दोहरे चरित्र वाले लोगों से किसानों को बचने की आवश्यकता है। कांग्रेस डूब चुकी है और अब वह किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर केंद्र सरकार पर निशाना साधना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ही किसानों की सबसे हितैषी पार्टी है।