यह ऐसी तकनीक है, जिससे उन चेहरों को आसानी से बेनकाब किया जा सकेगा, जो कुंभ में खलल डालने की मंशा से आएंगे। एफआरएस तकनीक के मुताबिक, अब तक उपलब्ध सभी अवांछित तत्वों की तस्वीरें पहले से ही अपलोड कर ली जाएंगी। कंट्रोल रूम को यह मैसेज मिल जाएगा कि पहले अपलोड की गई तस्वीर वाला व्यक्ति यहां दिखा है। इसके बाद उसे पकड़ा जाएगा।
कुंभ में सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम
एफआरएस तकनीक की खास बात यह है कि जिस व्यक्ति की तस्वीर पहले से अपलोड की गई होती है, उससे मेल खाता व्यक्ति जैसे ही कैमरे की निगाह में आता है तो उसकी खबर तुरंत कंट्रोल रूम के पास पहुंच जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक कुंभ में सुरक्षा के लिहाज से अहम साबित होगी।
महाकुंभ में सुरक्षा की तैयारियों को लेकर कई स्तर पर काम चल रहा है। फेस रिकग्निशन सिस्टम का प्रस्ताव तैयार कर शासन में भेजा गया है। मुहर लगते ही जल्द इसे लगवाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, कुंभ मेला