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केंद्र ने खारिज किया उत्तराखंड सरकार का भागीरथी मास्टर प्लान

Fri, 30 Dec 2016 10:02 AM IST
विवेक मिश्रा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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एनजीटी में केंद्र ने दायर किया हलफनामा
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उत्तराखंड सरकार देर से भी आई और दुरुस्त भी नहीं आई। पहले तो भागीरथी पर्यावरण संवेदी क्षेत्र के लिए जोनल मास्टर प्लान को तैयार करने में कई बरस लगे और उसमें भी कई खामियों के कारण सवालिया निशान लग गया है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय व जल संसाधन मंत्रालय की ओर से दाखिल संयुक्त हलफनामे में कहा गया है कि उत्तराखंड सरकार द्वारा तैयार किया गया जोनल मास्टर प्लान स्वीकार करने योग्य नहीं है। यह प्लान कई तरह की कमियों के साथ अधिसूचना की मूल भावना के भी विरुद्ध है।

एनजीटी के आदेश बाद 100 किलोमीटर दायरे वाले भागीरथी पर्यावरण संवेदी क्षेत्र को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय में दूसरी बैठक की गई। इस बैठक में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक व उत्तराखंड के मुख्य सचिव समेत विभिन्न विभागों के आला अधिकारी शामिल हुए। बैठक में उत्तराखंड सरकार की ओर से कहा गया कि भागीरथी पर्यावरण संवेदी क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए रास्ता खुलना चाहिए। इसको लेकर 2012 में जारी की गई अधिसूचना की वजह से राज्य में कई विकास कार्य रुके हुए हैं।
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सरकार के तर्कों पर उठे ये सवाल

सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
बैठक में उत्तराखंड सरकार के तर्कों पर सवाल उठाया गया। सदस्यों का कहना था कि जोनल मास्टर प्लान हिमालय की स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। सदस्यों ने कहा कि गोमुख से उत्तरकाशी तक गंगा को अविरल और निर्बाध रखना ही उचित होगा। वहीं सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान जल संसाधन मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार की ओर से रखी गई मांगों को स्वीकार करने से मना कर दिया है।

इस मामले पर पर्यावरण मंत्रालय के  एक सचिव स्तरीय अधिकारी ने कहा कि जब तक प्लान पूरी तरह अधिसूचना के अनुकूल नहीं होगा तब तक मंजूरी नहीं दी जाएगी। उत्तराखंड सरकार पर्यावरणीय संवेदी इलाके में विकास के नाम पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को मंजूरी और लैंड यूज बदलने जैसे अधिकार व छूट चाहती है वहीं पर्यावरणविद व केंद्रीय मंत्रालय इन बातों पर सहमत नहीं हैं।

वहीं एनजीटी में केंद्र की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि उत्तराखंड सरकार की ओर से दो बार दिए गए प्लान में कई तरह की कमियां है। मसलन पर्यावरण संवेदी क्षेत्र को लेकर कोई भी मूलभूत अध्ययन नहीं किया गया है। वहीं इस प्लान में 2012 की अधिसूचना में दी गई कई गाइडलाइन का भी उल्लंघन शामिल है।
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