तुम खुद ही अपने मित्र, स्वयं ही शत्रु
उन्होंने कहा कि गीता का हर श्लोक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। गीता कहती है कि तुम खुद ही अपने मित्र हो, स्वयं ही अपने शत्रु हो। बुरी आदत में उलझोगे तो अपने शत्रु बनोगे। स्वयं से स्वयं को जगाओ। उन्होंने कहा कि जीवन ही चुनौतियों का नाम है। चुनौतियां जब तक जीवन में नहीं हैं आगे बढ़ने की दृढ़ता भी नहीं बन पाती है। एक भ्रांति बनाई गई कि गीता सिर्फ संन्यासियों के लिए, मंदिरों में रखने के लिए है। गीता में सब कुछ है वह हर क्षेत्र के लिए है। बच्चों के लिए, युवाओं के लिए भी शोध किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: प्राथमिक शिक्षक पदों पर काउंसलिंग, कम मेरिट वाले के चयन से कानूनी दांव पेंच में उलझेगी भर्ती
गीता में हर प्रश्न का उत्तर
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि पढ़ाई के दिन से ही मन में जीवन के लिए कुछ प्रश्न थे। प्रश्न के उत्तर के रूप में गुरु का सानिध्य मिला और भगवत गीता की प्रेरणा मिली। इसमें पाया कि गीता में हर प्रश्न का उत्तर है और हर समस्या का समाधान है।