बच्चियों का जोश देखते ही बन रहा था। नाजुक हाथों में अत्याधुनिक असलहे और निगाहें निशाने पर। अभावों में पली ये बेटियां अब इतनी सयानी हो चली हैं कि उनके हौसले हवा से बातें करने लगे हैं। उनका इरादा है कि देश की रक्षा के लिए फौज और पुलिस अफसर बनकर कुछ कर दिखाएं।
राजधानी देहरादून के पुलिस लाइन में लगे शिविर में आजकल महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के साथ उन्हें सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।
बच्चियां मजदूर परिवारों से
शिविर की जानकारी जब वसंत विहार क्षेत्र की बच्चियों को लगी तो उनकी टोली पुलिस लाइन पहुंच गई। घर वालों को भी बच्चियों ने मना लिया। ये बच्चियां मजदूर परिवारों से हैं।
इनके आत्मविश्वास को देखकर पुलिस के अधिकारी और जवान भी दंग रह गए। वसंत विहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली पूजा (13), आरती (10), आयशा (13), स्वाति (13), सोनी (14), आरती (13), बिंदू (16), शीतल (10), काजल (15) और साक्षी (16) पुलिस लाइन जा पहुंचीं।
सुबह 11 बजे से एक घंटे तक इन बच्चियों ने कोच से जूडो-कराटे के गुर सीखे। फिर पिस्टल, रिवाल्वर और दूसरे असलहों के बारे में जानकारी ली। बच्चियों ने एयर गन से टार्गेट पर निशाना भी साधा।
निशाना लगाने की ट्रेनिंग
बच्चियों में असलहों के बारे में जानने के लिए इतनी उत्सुकता थी कि पुलिस वालों ने उन्हें एक-एक हथियार खोलने, गोलियां भरने और ट्रिगर दबाकर निशाना लगाने की ट्रेनिंग दे डाली। बच्चियों ने थ्री नॉट थ्री रायफल, इंसास, सेल्फ लोडेड रायफल (एसएलआर), एके-47, नाइन एमएम पिस्टल, रिवाल्वर चलाने का प्रशिक्षण लिया।
छात्राओं ने बताया कि प्रशिक्षण पाकर वे उत्साहित हैं। उनका इरादा है कि पुलिस या फौज में अफसर बनकर देश की सेवा करें। एसएसपी केवल खुराना का कहना है कि पुलिस की कोशिश होगी कि ऐसी छात्राओं की मदद की जाए। इसके लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा मिलने वाली स्कॉलरशिप की मदद भी ली जा सकती है।