विधानसभा चुनाव के ऐन पहले सरकार ने 30 दिन में मुकदमा वापसी की हाफ सेंचुरी लगा दी। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, पांच दिसंबर से तीन जनवरी के बीच कुल 50 मुकदमे वापस हुए। जिन मुकदमों की वापसी हुई है, उनमें हत्या के प्रयास, गैर इरादतन हत्या, धोखाधड़ी, गैंगेस्टर समेत अन्य संगीन अपराधों के मुकदमे भी शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर मामले अदालतों में ट्रायल पर थे।
जनहित का हवाला देकर मुकदमा वापसी करने की परंपरा अरसे से चली आ रही है। लगभग सभी सरकारें विभिन्न कारणों से इस प्रकार के मुकदमे वापस लेती हैं। इनमें ज्यादातर किसी घटना को लेकर लोगों के आक्रोश से होने वाली घटनाओं जैसे धरना-प्रदर्शन, जाम आदि से जुड़े रहते हैं। मगर उत्तराखंड में इस जिस तरह के मुकदमे वापस लिए गए हैं, उसमें जनहित की बात किसी के गले नहीं उतर रही है।
जानकारी के मुताबिक राज्य के विभिन्न जिलों से बीते 30 दिन के भीतर 50 मुकदमों की वापसी अपने आप में रिकार्ड है, क्योंकि महीने भर में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमा वापसी का यह संभवत: पहला मामला है। इस पूरी सूची में देहरादून के अलावा नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, पौड़ी और टिहरी के अलावा उत्तरकाशी, अल्मोड़ा आदि जिलों से जुड़े लोगों के नाम शामिल हैं।
वीरेंद्र सिंह मनराल के खिलाफ दर्ज छह मुकदमे वापस
भाजपाइयों पर भी बरसीं नियामतें
नैनीताल जिले के रहने वाले भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह मनराल उर्फ वीरू को कांग्रेस सरकार की कृपा कुछ ज्यादा ही प्राप्त हुई। साल भर में उनके खिलाफ छह मुकदमों को एक झटके में वापस ले लिया गया। अलग-अलग तारीखों में गृह विभाग की ओर से जारी आदेशों में रामनगर कोतवाली में वर्ष 2013 में दर्ज शस्त्र अधिनियम का मामला, एक अन्य मुकदमे में समाज विरोधी क्रियाकलाप की धारा 2/3 का मामला, हत्या के प्रयास समेत दर्जन भर धाराओं का मुकदमा, जिसमें सेवन क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट भी लगाया गया के साथ ही रामनगर कोतवाली में वर्ष-13 में ही हत्या के प्रयास समेत आधा दर्जन धाराओं का मामला सरकार ने वापस लेने के आदेश जारी कर दिए हैं।
इसके अतिरिक्त गत वर्ष में ही वीरेंद्र पर बलवा समेत तमाम धाराओं में दो अलग-अलग मुकदमे हुए, जिन्हें भी वापस लिया गया है। जानकारी के मुताबिक भाजपा नेता वीरेंद्र मनराल यहां बीडीसी मेंबर भी हैं। इसी तरह भाजपा के पार्षद ओमेंद्र भाटी के खिलाफ पटेल नगर थाने में दर्ज धार्मिक संस्थाओं के दुरुपयोग व बलवा और सेवन क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट के अलग-अलग दो मुकदमे भी सरकार ने वापस लिए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों मुकदमे 21 दिसंबर को जारी एक ही आदेश में जारी किए गए हैं।
पार्टी में आने का रिटर्न गिफ्ट
बीते दिनों समाजवादी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले अब्दुल मतीन अंसारी वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश के बुलावे पर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। इसके बदले उन्हें न केवल दर्जाधारी बनाया गया, बल्कि उनके खिलाफ चल रहे गैंगेस्टर एक्ट, सेवन क्रिमिनल ला अमेंडमेंट एक्ट, 3/4 लोक संपत्ति अनुरक्षण अधिनियम, आत्महत्या के लिए उकसाने और बलवा जैसी संगीन धाराओं में दर्ज मुकदमे को वापस भी ले लिया। इसके लिए 30 दिसंबर की तिथि में आदेश जारी किए गए हैं।
अन्य प्रमुख मुकदमे जिन्हें सरकार ने लिया वापस:
- टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर में भगत राम कोठारी के खिलाफ दर्ज गैर इरादतन हत्या का मुकदमा।
- देहरादून के विकासनगर में सचिन कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मुकदमा।
- ऊधमसिंह नगर के किच्छा में तुलाराम उर्फ ताराचंद के खिलाफ दर्जन भर धाराओं का मुकदमा।
- देहरादून कोतवाली में बॉबी सिंह उर्फ रवि कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा।
- ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में आशिम खां उर्फ रशिद पठान के खिलाफ डकैती का मुकदमा।
- पौड़ी गढ़वाल के लक्ष्मणझूला में राजेश कुमार के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा।
कई बार लोकहित में मुकदमा वापस लेना सरकार के लिए आवश्यक हो जाता है। उदाहरण के लिए कई बार धरना-प्रदर्शन के दौरान विवाद होने पर मुकदमे हो जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसे अपने ऊपर दर्ज मुकदमे के चलते अदालतों के चक्कर लगाने में दिक्कत होती है, तो भी उसे वापस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती। मगर अब वोट बैंक और पॉलिटिकल कनेक्शन के बूते मुकदमा वापसी होने लगी है। इसमें कई आपराधिक मुकदमे भी वापस हो रहे हैं, जो कतई उचित नहीं है। हालांकि, अंतिम फैसला कोर्ट का होता है कि मुकदमा वापसी की अनुमति देनी है या नहीं। पूर्व में कई ऐसी नजीर कोर्ट की ओर से पेश की गई हैं, जिनमें मुकदमा वापसी की फाइल वापस वापस हुई है।
- जेएस पांडे, पूर्व डीजीपी
सरकार की ओर से मुकदमा वापसी की संस्तुति की जाती है। असल में उन्हें वापस लेना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। जिन मामलों में वापसी की सिफारिश की गई है, उनमें अधिकांश में न्याय विभाग की सहमति है। ये ज्यादातर मामले धरना-प्रदर्शन या अन्य राजनैतिक कारणों से दर्ज कराए गए मुकदमे हैं।
- डा. उमाकांत पंवार, प्रमुख सचिव (गृह)