यूं तो बेसहारा और मानसिक तौर पर बीमार बच्चों को रखने के लिए अनाथ आश्रमों में जगह नहीं है। दूसरी ओर स्नेह सदन जैसे बाल आश्रम में बच्चों की जगह बिस्तरों में कुत्ते, बिल्ली सो रहे हैं।
चाइल्ड हेल्प लाइन के पास आए दिन मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के केस आते हैं। उनके पास बच्चों को रखने की समस्या होती है। खंडहर में तब्दील हो रहे स्नेह सदन की किसी ने सुध लेने की कभी कोशिश नहीं की।
देहरादून में टपकेश्वर चौक गढ़ी कैंट स्थित स्नेह सदन का निर्माण छावनी परिषद ने 2010-11 में किया था। मानसिक तौर पर बीमार बच्चों को रखने के लिए इसका निर्माण किया गया था। निर्माण के बाद से अब तक यह खाली है।