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खूबसूरत कंपाउंड पर लगा ‘ग्रहण’

Thu, 29 Aug 2013 08:39 AM IST
अमर उजाला, ऋषिकेश
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तीर्थनगरी में 11 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन बस टर्मिनल अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है। पूरे कैंपस में चारों ओर पसरे अतिक्रमण से न सिर्फ खूबसूरत टर्मिनल कंपाउंड की सुंदरता पर दाग लगा रहा है, बल्कि इससे योजना का उद्देश्य भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा। सारी अव्यवस्था देख समझने के बावजूद नगर पालिका, जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
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केंद्रीय मेगा पर्यटन सर्किट योजनाहरिद्वार-ऋषिकेश-मुनिकीरेती-स्वर्गाश्रम केंद्रीय मेगा पर्यटन सर्किट योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ने तीर्थनगरी के बस अड्डे को बस टर्मिनल कंपाउंड बनाने के लिए 2009 में 11 करोड़ की वित्तीय मंजूरी दी थी। कुल चार हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित योजना के तहत .5 हेक्टेयर भूमि पर पर्यटन केंद्र और अन्य पर्यटक सुविधाओं के लिए भवन आदि निर्माण किए जाने थे, जबकि 3.5 हेक्टेयर भूमि को बड़े वाहनों बसों की पार्किंग के लिए आरक्षित किया गया। जिस पर 1100 वाहनों को पार्क किया जाना था।
2010 में कार्यदायी संस्था उत्तरप्रदेश निर्माण निगम द्वारा शुरू की गई योजना लगभग पूरी हो चुकी है, बावजूद इसके करीब साढ़े तीन साल बाद भी यहां पसरे अतिक्रमण का समाधान नहीं हो पाया। खूबसूरत टर्मिनल के चारों ओर जगह-जगह लगे खोखे, ठेली, खोमचे इसकी सुंदरता पर ग्रहण लगा रहे हैं।
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इससे टर्मिनल के निर्माण का मकसद भी फिलवक्त अधूरा रह गया है। योजना के मुताबिक जिस भूमि पर पार्किंग बनाई गई है, उसके करीब 15 से 20 फीसदी हिस्से पर अतिक्रमण पसरा हुआ है। इसके चलते वाहनों को पार्क करने के लिए जगह नहीं बची है, लिहाजा वाहन चालकों को मजबूरी में उन्हें दूसरी जगह पार्क करना पड़ता है।
पुल और सड़कें बनी हैं पार्किंगसंयुक्त यात्रा बीटीसी कैंपस में पसरे अतिक्रमण के कारण वाहनों को पार्किंग की सुविधा नहीं मिल रही। जिससे वाहन चालक बसों को टर्मिनल कंपाउंड के प्रवेश और निकासी मार्गों, चंद्रभागा नदी पर चौदहबीघा को जोड़ने वाले नए ब्रिज, कंपाउंड के आंतरिक मार्गों पर पार्क करनी पड़ती है। इससे न सिर्फ आवागमन बाधित हो रहा है, कई बार जाम भी लग जाता है। मार्गों, पुल पर खड़े वाहनों से दुर्घटना का अंदेशा भी बना रहता है।
निर्माण में भी आई बाधामेगा पर्यटन सर्किट योजना के अंतर्गत बस टर्मिनल कंपाउंड को तीन साल में बनकर तैयार होना था, मगर कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य के लिए वन भूमि हस्तांतरण के साथ ही परिसर में पसरे अतिक्रमण के कारण योजना तैयार करने में दिक्कतें आई। समय पर स्पेस नहीं मिलने से कई कार्य विलंब से शुरू हो पाए।

लिहाजा 2012 में जिस योजना को तैयार होना था, उस पर अगस्त 2013 तक निर्माण कार्य जारी है, जिसमें अभी माहभर से अधिक समय और लगेगा। कार्यदायी संस्था के रेजिडेंट इंजीनियर अतुल मलासी ने बताया कि भूमि हस्तांतरण और परिसर में अतिक्रमण के कारण निर्माण कार्य कई दफा बाधित रहा।
दुकानों का मामला पड़ा है लंबितयोजना का क्रियान्वयन शुरू होने के बाद यहां अस्थायी दुकानें लगाने वाले व्यापारियों ने नगर पालिका प्रशासन से पक्की दुकानें बनाकर आवंटन की मांग की थी। इसके लिए विभिन्न विभागों की एक कमेटी का गठन भी किया गया है।

जिसे यहां लंबे समय से संचालित हो रहे खोखों को चिह्नित करना था और साथ ही यह मानक तय करना था कि किस अवधि तक यहां बसे और व्यवसाय कर रहे व्यवसायियों को दुकानों का आवंटन किया जाए। कमेटी अभी तक ऐसी दुकानों को चिह्निकरण और उन्हें सूचीबद्ध ही नहीं कर पाई है।
इनकी सुनिएअस्थायी अतिक्रमण के बाबत कमेटी बनाई गई है, जो दुकानों के आवंटन के  लिए समय सीमा निर्धारित करेगी। यह कार्य जल्द होने की संभावना है। -डीपी भट्ट, ईओ नगर पालिका
कमेटी द्वारा नगर पालिका से टर्मिनल कंपाउंड में स्थापित खोखों की समयबद्ध सूची मांगी गई है, इसके बाद ही मानक तय किए जाएंगे। जल्द टर्मिनल कंपाउंड में व्याप्त अतिक्रमण की समस्या का समाधान करा लिया जाएगा।-वाईके गंगवार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
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