इससे पहले यातायात नियमों को तोड़ने पर वाहन चालक को निर्धारित जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता था। बड़ी दुर्घटना होने पर कभी-कभार एक-दो वाहन चालकों के लाइसेंस जब्त (रिवोक) भी किए गए होंगे।
हाल यह है कि परिवहन विभाग के पुराने अधिकारी दिमाग पर काफी जोर डालने के बाद भी आजीवन प्रतिबंध के इक्का-दुक्का मामले ही याद कर पाते हैं। बदलाव के इस दौर में सुप्रीम कोर्ट के सड़क हादसों को लेकर कड़े रुख के बाद सरकारी तंत्र हरकत में आया है। परिवहन विभाग ने अप्रैल से नवंबर -2017 की अवधि में 81 वाहन चालकों के लाइसेंस को मोटर वाहन अधिनियम-1988 की धारा-19 के तहत जब्त कर लिया है।
ये वाहन स्वामी अब आजीवन वाहन नहीं चला सकेंगे। लाइसेंस जब्त करने की कार्रवाई में पहाड़ के कार्यालय के आगे रहे हैं। टिहरी में 65, पिथौरागढ़ में 10, उत्तरकाशी में चार और अल्मोड़ा-देहरादून आरटीओ कार्यालय ने एक-एक लाइसेंस जब्त किए हैं। इसके अलावा 360 वाहन चालकों को आखिरी चेतावनी दी गई है। अगर उन्होंने अब एक भी गलती की तो लाइसेंस जब्त होना तय है। इसी अवधि के दौरान ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर 3934 चालकों के लाइसेंस भी तीन से छह माह के लिए निलंबित किए गए हैं।
अपराध
- शराब पीकर वाहन चलाना
- तेज गति
- ओवर लोडिंग करना
- मोबाइल पर बात करते हुए वाहन की ड्राइविंग
- भारवाहन में सवारी को ढोना
- लाल बत्ती को जंप करना
अब दूसरे राज्य से भी नहीं बना पाएंगे लाइसेंस
सड़क हादसों को कम करने के लिए जागरूकता कार्यक्रमों के अलावा लापरवाह चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। इसी के तहत लाइसेंस जब्त करने और निलंबन की कार्रवाई की गई है। परिवहन विभाग का नेशनल रजिस्टर बना हुआ है, इसमें यह सूचना भी दर्ज की गई है। ऐसे में जालसाजी कर दूसरे प्रदेश या दूसरे राज्य के आरटीओ /एआरटीओ कार्यालय से नया लाइसेंस बनाने की कोशिश की जाएगी, तो वह भी संभव नहीं होगा। ऐसे में सावधानी और सुरक्षित वाहन चलाने का चालकों से अनुरोध किया जा रहा है।
- एसके सिंह, सहायक परिवहन आयुक्त