राज्य की बीसीसीआई की पूर्ण मान्यता पर बहुत जल्द फैसला हो सकता है। प्रशासकों की समिति (सीओए) ने राज्य के चारों क्रिकेट संघों को अपना पक्ष रखने का समय दिया है। संघों के एकजुट न होने के चलते बीसीसीआई अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है। 15 जुलाई के बाद राज्य की पूर्ण मान्यता पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद इस मामले में जल्द फैसला होने की उम्मीद बंधने लगी है। राज्य गठन के करीब 19 वर्ष होने के बावजूद राज्य को बीसीसीआई की पूर्ण मान्यता नहीं मिल पाई है। चार प्रमुख रूप से सक्रिय संघों के पदाधिकारी एकजुट होकर काम करने को तैयार नहीं हैं, जिसके चलते यह मामला लटका हुआ है।
पिछले माह बीसीसीआई की दो सदस्यीय समिति ने राज्य का दौरा कर चारों संघों के पदाधिकारियों से मुलाकात की थी। संघों से उनके पास उपलब्ध संसाधनों, सुविधाओं, कार्यकारिणी, पूर्व में किए गए कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली गई।
सबा करीम और अंशुमान गायकवाड़ की समिति ने सभी संघों से बातचीत के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की थी। सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट में एक खेल संघ के पास पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं होने का दावा करते हुए उनके पक्ष में सिफारिश की गई है।
इसके साथ ही सीओए ने अन्य संघों को भी उनका पक्ष रखने का समय दिया है। बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में बीसीसीआई चंडीगढ़ और उत्तराखंड में क्रिकेट संचालन के लिए एडहॉक कमेटी बनाने का फैसला भी कर सकती है।