कांग्रेस के हालात उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे न हो जाएं
हल्द्वानी में एआईसीसी और पीसीसी से नाम गायब होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अंदर ही अंदर उबाल है। कांग्रेसियों की नाराजगी निकाय चुनाव में बड़ा विस्फोट कर सकती है। सोशल मीडिया पर चल रही जंग में कांग्रेस नेतृत्व को चेताने के साथ ही कहा जा रहा है कि उत्तराखंड में भी कांग्रेस के हालात उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे न हो जाएं।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भी कांग्रेस में बड़े नेता गुटबाजी और भाई-भतीजावाद से बाज नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव खजान पांडे ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से विरोध दर्ज कराया था। पांडे को पीसीसी सदस्य नहीं बनाया गया है। प्रदेश की अभी नई कार्यकारिणी नहीं बनी है और भविष्य का पता नहीं कि प्रदेश महासचिव रहेंगे या नहीं।
पांडे कहते हैं कि किसी भी अल्पसंख्यक को एआईसीसी में जगह नहीं दी गई। ललित जोशी का नाम भी पीसीसी सदस्य में नहीं है। तराई के नेता भी मान रहे हैं कि तराई की उपेक्षा हो रही है और तराई में नए गुट खड़े किए जा रहे हैं। बागेश्वर और कपकोट जैसे स्थानों पर भी कांग्रेस संगठन का लचर रवैया है जो कांग्रेस को यूपी और बिहार जैसे हालातों में खड़ा कर सकता है। सोशल मीडिया में ललित जोशी के लिए लिखा गया है कि हल्द्वानी में अपनों को एआईसीसी और पीसीसी में ले जाने की रणनीति पर काम चल रहा है।
एनएसयूआई, छात्र संघ, यूथ कांग्रेस में 26 वर्षों तक अपनी सेवा देने ललित जोशी या उनके जैसे अन्य सक्षम लोगों का योगदान नहीं लिया गया। एआईसीसी और पीसीसी में किसी बड़े नेता के द्वारा नाम काटना पार्टी के लिए दुर्भाग्य की बात है। सोशल मीडिया पर चल रही इस तरह की टिप्पणियों से साफ है कि कांग्रेस के भीतर उबाल निकाय चुनाव में कुछ रंग लाएगा। इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष से बात करने का प्रयास किया गया मगर उन्होंने फोन नहीं उठाया।