रोज-रोज उत्पीड़न का शिकार हो रही मां को न्याय दिलाने के लिए ‘सीएम’ ने अपने पिता के खिलाफ केस दर्ज करवाने के बाद उसे जेल भिजवा दिया। ‘सीएम’ के इस कदम से पुलिस प्रशासन भी हैरत में है।
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दरअसल, यहां बात प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत की नहीं, बल्कि बाल विधानसभा की मुख्यमंत्री अदिति शर्मा की हो रही है। अपने अधिकारों के प्रति सजग अदिति के लिए एफआईआर दर्ज करवाना आसान नहीं था।
दिनभर कभी पुलिस तो कभी महिला आयोग, फिर बाल विकास के चक्कर काटने के बाद मामला तूल पकड़ते देख पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
पुलिस ने नहीं लिखी एफआईआर पर नहीं मानी हार
पुलिस
- फोटो : demo pic
बाल विधानसभा की मुख्यमंत्री अदिति शर्मा के पिता आए दिन अपनी पत्नी (अदिति की मां) को पीटते हैं और मानसिक रूप से मां और बेटी को प्रताड़ित करते हैं। शनिवार को तो उन्होंने हद ही कर दी। पत्नी को इतना पीटा कि वह बेहोश हो गईं।
पत्नी को पीटने के बाद वह घर छोड़कर चले गए। 16 वर्षीय मुख्यमंत्री और उसके छोटे भाई ने जैसे-तैसे मां को अस्पताल पहुंचाया। इसकी शिकायत लेकर जब बाल विधानसभा की मुख्यमंत्री अदिति थाने पहुंची तो उन्हें टरका दिया गया।
महिला आयोग, बाल विकास में शिकायत कर दोपहर बाद जब अदिति के बारे में पुलिस और आला अधिकारियों को पता चला तो अदिति की शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई। सोमवार शाम तक अदिति के पिता को पौड़ी कोतवाली थाने में बुलाकर गिरफ्तार कर लिया गया।
'सीएम’ दर-दर भटके, न्याय को तरसे... पल-पल अपडेट
पुलिस
- फोटो : Demo Pic
स्थान : पौड़ी कोतवाली थाना, समय -10:30 बजे
अदिति - मेरी मां को कई सालों से पापा मारते-पीटते चले आ रहे हैं। मुझे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी है।
एसओ (डीएल भारती)- ऐसे केस दर्ज नहीं होता। घरेलू हिंसा के लिए तुम्हारे बाप को जेल थोड़े ही भेज देंगे।
अदिति- घरेलू हिंसा का केस नहीं होता। तो फिर क्या होता है?
एसओ- घरेलू हिंसा हर घर में होती है, कोई भी आदमी जेल नहीं जाता। बाल विकास में जाओ, वहां मामला जाएगा।
समय -11.30 बजे- महिला आयोग अध्यक्ष को किया फोन
सरोजनी कैंतुरा (महिला आयोग अध्यक्ष)-तुम बाल विकास जाओ। एसओ से मैं केस दर्ज करने को कहती हूं।
स्थान - बाल विकास - समय-12:10 बजे
शोभन सिंह रावत (बाल विकास) -अदिति के पिता को फोन किया कि आपके खिलाफ केस दर्ज कराया गया है।
अदिति के पिता- (पत्नी के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हुए) मुझे तलाक चाहिए।
शोभन सिंह रावत -अदिति तुम अपनी मां का मेडिकल कराओ। यह आदमी कुछ भी कर सकता है।
'तो उन बच्चों का विश्वास मुझसे उठ जाता'
पुलिस
- फोटो : Bureau
स्थान - पौड़ी कोतवाली थाना, समय 3:30 बजे
अदिति - आपने एफआईआर दर्ज की।
एसओ- हां.. कर रहे हैं.. हो जाएगी... तुम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम लेटर लिख दो। फिर काउंसिलिंग के लिए बुलाया जाएगा। अब जाओ घर..
‘बचपन से देखती आ रही हूं। ऐसा कोई दिन नहीं, जब पापा मां को पीटते नहीं है। मैं बहुत हैरान हूं कि एक शिक्षक होकर मेरे पिता ऐसी हरकत करते हैं। मां के लिए बेहद गंदे शब्दों का प्रयोग करते हैं। मैं कैसे चुप बैठ सकती थी। आज आवाज नहीं उठाती तो उत्तराखंड के उन बच्चों का मुझ पर से विश्वास उठ जाएगा, जिन्होंने मुझे मुख्यमंत्री चुना है।’
-अदिति शर्मा, मुख्यमंत्री, बाल विधानसभा
उत्तराखंड एक मात्र ऐसा राज्य है जहां बाल विधानसभा का गठन हुआ है। इसकी कार्यशैली विधानसभा की ही तरह है। साल में कम से कम दो बार आयोजित होने वाली बालविधानसभा में खुद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल पहुंचते हैं।
स्पीकर और बाल विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में सत्र चलता है। बच्चों के समस्याएं सरकार के सामने आ सके, इसके लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग और भुवनेश्वरी महिला आश्रम और प्लान इंडिया के सहयोग से 26 जनवरी 2014 को बाल विधानसभा का गठन हुआ।
बाल विधानसभा विधायक और मंत्री अपने अपने क्षेत्रों में बच्चों कि समस्याओं पर काम करते है और सत्र के दौरान सदन में उनकी समस्याओं को उठाते हैं। अदिति शर्मा इसी बाल विधानसभा की मुख्यमंत्री हैं।