पाटी तहसील का तोली गांव बेहतर मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन के लिए जाना जाता है।
गांव को अलग पहचान दिलाने में अन्य किसानों के साथ-साथ प्रगतिशील किसान पीतांबर गहतोड़ी ने भी हाड़तोड़ मेहनत की है, जो अब रंग लाने लगी है। स्वयं के बूते मत्स्य पालन को नए आयाम देकर वह सफलता की इबारत लिख रहे हैं। मत्स्य पालन के बाद शेष बचे पानी से वह पॉलीहाउस में बेमौसमी सब्जियों की सिंचाई करते हैं। वह कहते हैं कि आधुनिक तकनीक अपनाने से किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। पहले जहां उनकी वार्षिक आमदनी एक लाख 25 हजार रुपये तक होती थी, वहीं नई तकनीक अपनाने के बाद उनकी आमदनी दो लाख रुपये से अधिक हो गई है।
गहतोड़ी ने अपने खेतों में पानी के पक्के टैंकों का निर्माण किया है। इसके अलावा, उनके बगीचे में सेब, अखरोट, आडू और पुलम के 150 से अधिक पेड़ हैं। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना से वह मत्स्य पालन के साथ ही बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन और फूलों की खेती भी कर रहे हैं। उनसे प्रेरणा लेकर अन्य काश्तकार भी मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन को अपनी आजीविका का जरिया बना रहे हैं।
कई सम्मान, पुरस्कार मिले
प्रगतिशील काश्तकार पीतांबर गहतोड़ी अब तक कई सम्मन और पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। इनमें वर्ष 2010 में जिला किसान पुरस्कार, गरीब महिलाओं के उत्थान के लिए राज्यपाल मार्ग्रेट अल्वा सम्मान, मत्स्य पालन के लिए तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार की ओर से सम्मान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वर्ष 2008 में सम्मान, राष्ट्रीय शीत जल मत्स्य निदेशालय भीमताल और लखनऊ मत्स्य संस्थान की ओर से वर्ष 2006 में मत्स्य श्री पुरस्कार भी उन्हें मिल चुका है। इसके अलावा, कई जिलाधिकारी भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।